Petrol Diesel Price Hike: मिडिल ईस्ट जंग का भारत में पहला बड़ा धमाका: प्राइवेट पंपों पर डीजल ₹25 तो पेट्रोल इतने रुपए तक महंगा

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 08:44 AM

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Petrol Diesel Price Hike: ईरान-इजरायल युद्ध की तपिश अब सीधे भारतीय आम आदमी की जेब तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई सुनामी के बाद देश की निजी तेल कंपनियों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। शेल इंडिया (Shell India) और नायरा...

Petrol Diesel Price Hike: ईरान-इजरायल युद्ध की तपिश अब सीधे भारतीय आम आदमी की जेब तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई सुनामी के बाद देश की निजी तेल कंपनियों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। शेल इंडिया (Shell India) और नायरा एनर्जी (Nayara Energy) जैसी दिग्गज कंपनियों ने 1 अप्रैल से ईंधन के दामों में ऐसी ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है, जिसने बाजार में हड़कंप मचा दिया है।

डीजल की कीमतों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, बेंगलुरु में हाहाकार
प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स ने डीजल की कीमतों में एक झटके में ₹25.01 का भारी-भरकम इजाफा कर सबको चौंका दिया है। इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर बेंगलुरु जैसे शहरों में दिख रहा है, जहां शेल के पंपों पर रेगुलर डीजल अब ₹123.52 और प्रीमियम वेरिएंट ₹133.52 प्रति लीटर पर पहुँच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में डीजल ₹165 का आंकड़ा भी पार कर सकता है।

पेट्रोल भी हुआ बेकाबू, ₹120 के करीब पहुंची कीमत
सिर्फ डीजल ही नहीं, पेट्रोल के दाम भी आम आदमी के बजट को बिगाड़ रहे हैं। शेल इंडिया ने पेट्रोल के दाम में ₹7.41 प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की है, जिसके बाद रेगुलर पेट्रोल ₹119.85 और प्रीमियम पेट्रोल ₹129.85 प्रति लीटर के स्तर पर जा पहुँचा है। अचानक आई इस तेजी से निजी पंपों पर ग्राहकों की कतारें गायब होने लगी हैं।

आखिर क्यों लगी तेल के बाजार में यह आग?
इस महंगाई के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में छिड़ा ईरान-इजरायल युद्ध है। फरवरी के अंत में शुरू हुए हमलों के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 60% का उछाल आया है और कच्चा तेल $100 प्रति बैरल को पार कर गया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% तेल विदेशों से मंगवाता है, और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव ने सप्लाई चेन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

सरकारी और प्राइवेट पंपों के बीच बढ़ी खाई
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल कीमतों को थाम रखा है, वहीं प्राइवेट कंपनियों ने सारा बोझ ग्राहकों पर डाल दिया है। दरअसल, सरकारी कंपनियों को होने वाले घाटे की भरपाई सरकार की ओर से हो जाती है, लेकिन शेल और नायरा जैसी निजी कंपनियों को ऐसा कोई वित्तीय सहारा नहीं मिलता। घाटे से बचने के लिए इन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से रेट बढ़ा दिए हैं, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।

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