17 भाषाओं में गूंजेगी नेपाल की संसद, 14 मैथिली में और 3 भोजपुरी में लेंगे शपथ

Edited By Updated: 25 Mar, 2026 03:23 PM

14 mps to take oath in maithili 3 in bhojpuri in nepal parliament

नेपाल के प्रतिनिधि सभा के 274 सदस्य शपथ लेने जा रहे हैं, जिसमें 47 सांसद अपनी मातृभाषाओं में शपथ लेंगे। इस बार संसद में 17 भाषाओं का उपयोग होगा, जिनमें मैथिली, थारू और भोजपुरी प्रमुख हैं। यह पहल नेपाल की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है।...

इंटरनेशनल डेस्क : नेपाल के संसदीय इतिहास में 26 मार्च का दिन खास बनने जा रहा है, क्योंकि इस दिन नव निर्वाचित प्रतिनिधि सभा के 274 सदस्य शपथ लेने जा रहे हैं। इस बार का शपथ ग्रहण समारोह अपनी भाषाई विविधता के कारण चर्चा में है। संसद सचिवालय के अनुसार, 47 सांसदों ने नेपाली भाषा के बजाय अपनी मातृभाषाओं में शपथ लेने का निर्णय लिया है, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।

शपथ ग्रहण की प्रक्रिया और संवैधानिक परंपरा

शपथ ग्रहण की प्रक्रिया बुधवार से ही शुरू हो चुकी है। नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य अर्जुन नरसिंह केसी ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से शपथ ली है। संवैधानिक परंपरा के अनुसार, केसी गुरुवार दोपहर 2 बजे बाकी सभी 274 सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। नियम के मुताबिक, किसी भी सांसद को संसद या समिति की बैठक में हिस्सा लेने से पहले शपथ लेना अनिवार्य होता है।

17 भाषाओं में गूंजेगी संसद

इस बार नेपाल की संसद में कुल 17 अलग-अलग भाषाओं में शपथ ली जाएगी, जो देश की भाषाई विविधता को दर्शाता है। सबसे ज्यादा 14 सांसदों ने मैथिली भाषा को चुना है, जिनमें मनीष झा, मातृका प्रसाद यादव और अंकिता ठाकुर जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इसके अलावा:

  • 7 सांसद थारू भाषा में शपथ लेंगे
  • 3 सांसद भोजपुरी भाषा का चयन करेंगे
  • खुशबू ओली संस्कृत भाषा में शपथ लेंगी

इसके साथ ही डोटेली, बजिका, मगही, अवधी, तामांग, बांतावा और चामलिंग जैसी कई अन्य भाषाओं में भी सांसद अपनी शपथ लेंगे।

विभिन्न दलों और नेताओं की भूमिका

हर्क संपांग के नेतृत्व वाली श्रम संस्कृति पार्टी के 7 सांसद अलग-अलग मातृभाषाओं में शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, पार्टी प्रमुख हर्क संपांग स्वयं नेपाली भाषा में ही शपथ लेंगे। इसके अलावा, विराज भक्त श्रेष्ठ और मदन कृष्ण श्रेष्ठ जैसे कई चर्चित सांसदों ने भी नेपाली भाषा में शपथ लेने का निर्णय लिया है।

संविधान और मातृभाषा का अधिकार

नेपाल के संविधान में यह प्रावधान है कि यदि कोई सांसद अपनी मातृभाषा में शपथ लेना चाहता है, तो उसे निर्धारित समय के भीतर संसद सचिवालय को इसकी जानकारी देनी होती है। इस प्रावधान के चलते सांसदों को अपनी भाषा में शपथ लेने का अधिकार मिलता है, जिससे देश की बहु-सांस्कृतिक और बहु-भाषाई पहचान को और मजबूती मिलती है।

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