Edited By Tanuja,Updated: 11 Apr, 2026 03:20 PM

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच “मेक या ब्रेक” वार्ता शुरू हो गई है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका “America First” नीति के साथ आया तो समझौता संभव है, लेकिन “Israel First” रुख रहा तो डील नहीं होगी। अगले 48 घंटे बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।
International Desk: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बेहद अहम और “मेक या ब्रेक” शांति वार्ता शुरू हो गई है। इस वार्ता को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह पश्चिम एशिया के भविष्य को तय कर सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद इन बातचीत को “निर्णायक” बताया है। यह वार्ता 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम के बाद हो रही है और इसका उद्देश्य संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म करना है।
ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर बातचीत “America First” सोच के साथ होती है, तो समझौता संभव है। लेकिन अगर अमेरिका “Israel First” नीति अपनाता है, तो कोई डील नहीं होगी और संघर्ष और बढ़ सकता है।ईरान का प्रतिनिधिमंडल मोहम्मद बगेर गालिबफ के नेतृत्व में आया है, जबकि अमेरिका की ओर से जे डी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनेर शामिल हैं। यह बैठक बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को पाकिस्तान के एयरस्पेस में AWACS, फाइटर जेट्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की सुरक्षा दी गई।
बताया जा रहा है कि इस वार्ता के लिए सिर्फ 15 दिन का समय तय किया गया है, लेकिन आने वाले 48 घंटे सबसे ज्यादा अहम होंगे। इन्हीं घंटों में तय होगा कि यह संघर्ष शांति में बदलेगा या फिर क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा। इस्लामाबाद की यह वार्ता सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा मोड़ बन सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान समझौते तक पहुंचेंगे या फिर “America First vs Israel First” की लड़ाई टकराव को और बढ़ा देगी।