Edited By Tanuja,Updated: 01 Nov, 2026 01:29 PM

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि कतर के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य दो दिन में खोलने का प्रस्ताव तैयार हुआ है। इसके लिए अमेरिका को प्रतिबंध हटाने, सैन्य मौजूदगी घटाने, तेल छूट बहाल करने और जमी हुई ईरानी संपत्तियां जारी करने की...
Tehran: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को लेकर अमेरिका के सामने अपनी शर्तें रख दी हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि कतर के मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है। इस दौरान जलडमरूमध्य को दो दिन के भीतर खोलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे पहले इसके लिए पांच दिन की समयसीमा पर चर्चा हुई थी। अराघची के मुताबिक, कतर की ओर से पांच दिन की अवधि को घटाने का सुझाव दिया गया था। अब दोनों पक्षों के बीच ऐसा प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें ईरान की शर्तें पूरी होने पर दो दिन में होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की बात कही गई है।
ईरान की चार बड़ी मांगें
अराघची ने बताया कि तेहरान की प्रमुख मांगों में इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के बाद लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों की मौजूदगी कम करना, तेल पर मिली छूट दोबारा बहाल करना और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करना शामिल है। ईरान ने विशेष रूप से कतर में जमा अपने धन को भी वापस देने की मांग की है। इसके अलावा, तेहरान चाहता है कि ओमान के साथ बातचीत में तय किए गए होर्मुज के नए जहाजरानी मार्ग को औपचारिक मान्यता मिले और दूसरे मार्ग बंद किए जाएं। अराघची ने कहा कि ईरान की शर्तों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलने से वाशिंगटन के साथ बाकी मुद्दों पर बातचीत शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।
लेबनान को लेकर मांग भी शामिल
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रजाई पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक तेहरान की सात शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक न तो बातचीत होगी और न ही होर्मुज जलडमरूमध्य खोला जाएगा। ईरान की मांगों में अमेरिकी प्रतिबंध हटाने, क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कम करने, तेल संबंधी छूट बहाल करने और विदेशों में जमा ईरानी धन जारी करने के अलावा युद्ध को सभी मोर्चों पर समाप्त करना भी शामिल है। इसमें खास तौर पर लेबनान में इजराइल के हमलों को रोकने की मांग की गई है। रजाई ने कहा कि यदि ईरान की शर्तें पूरी होती हैं तो कूटनीति का रास्ता खुला रहेगा। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान पर हमला किया गया तो देश की सेना नए हथियारों से हमलावर को करारा जवाब देगी।
जेडी वेंस का पत्र मिलने के बाद बदला अमेरिका का रुख?
अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत उस समय तेज हुई जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का एक पत्र कतर के मध्यस्थों के जरिए मोहसिन रजाई तक पहुंचाया गया। रजाई ने इस संदेश के बाद कहा कि अमेरिका के बातचीत करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने इसे ईरान के लिए सकारात्मक संकेत बताया। बताया गया है कि अमेरिकी संदेश में बातचीत का एक ढांचा पेश किया गया था, न कि युद्ध समाप्त करने की कोई अंतिम शर्त। प्रस्ताव में जेडी वेंस के नेतृत्व में सीधी बातचीत और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को चर्चा में शामिल करने की बात कही गई है। इससे पहले अराघची भी अमेरिकी संवाद की कोशिश को सकारात्मक कदम बता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि तेहरान ने पत्र का अध्ययन किया है और इस सिलसिले में उनका एक सहयोगी कतर में मध्यस्थों से बातचीत के लिए गया था।
ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान बातचीत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और ईरान बार-बार संवाद की इच्छा जता रहा है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर दोबारा हमले की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के बचे हुए परमाणु ठिकानों को महज 10 मिनट में निशाना बना सकता है। हैलोवीन कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है और बातचीत ठीक चल रही है, लेकिन उन्होंने तेहरान को भरोसेमंद नहीं बताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ईरान पर फिर से हमला करने का आदेश देंगे, तो उन्होंने सवाल को बेवकूफाना बताते हुए कहा कि यदि ऐसा कोई फैसला लिया भी गया तो वह इसके बारे में पहले से जानकारी नहीं देंगे।