यहां लोग रहते तो हैं पर घर नहीं बना सकते, जानें आखिर क्यों अपनी ही जमीन पर परमानेंट घर को तरसते हैं लोग?

Edited By Updated: 14 Mar, 2026 01:02 PM

centralia ghost town this town is situated at the mouth of hell

क्या आप ऐसे किसी शहर की कल्पना कर सकते हैं जहां सड़कें फटी हुई हों और ज़मीन की दरारों से जहरीला धुआं निकलता हो? अमेरिका के पेंसिलवेनिया में स्थित सेंट्रालिया एक ऐसी ही जगह है। यह दुनिया का वह अनोखा शहर है जहां की सरकार ने न केवल लोगों को पक्के घर...

Centralia Ghost Town: : क्या आप ऐसे किसी शहर की कल्पना कर सकते हैं जहां सड़कें फटी हुई हों और ज़मीन की दरारों से जहरीला धुआं निकलता हो? अमेरिका के पेंसिलवेनिया में स्थित सेंट्रालिया एक ऐसी ही जगह है। यह दुनिया का वह अनोखा शहर है जहां की सरकार ने न केवल लोगों को पक्के घर बनाने से रोक दिया है बल्कि इसका वजूद ही नक्शे से मिटाने की कोशिश की है।

कैसे शुरू हुई तबाही की आग?

इस शहर की बर्बादी की कहानी 1962 में शुरू हुई थी। एक लैंडफिल (कचरे के ढेर) में लगी आग पास की एक पुरानी कोयला खदान की सुरंगों तक पहुंच गई। देखते ही देखते यह आग ज़मीन के नीचे दबे कोयले के विशाल भंडार में फैल गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज़मीन के नीचे इतना कोयला मौजूद है कि यह आग अगले 200 से 250 साल तक जलती रह सकती है।

ज़मीन के नीचे जहरीला जाल

सेंट्रालिया में रहना किसी सुसाइड मिशन से कम नहीं है इसके पीछे मुख्य कारण ये हैं। ज़मीन की दरारों से लगातार कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी घातक गैसें निकलती रहती हैं। नीचे कोयला जलने से ज़मीन अंदर से खोखली हो गई है। यहां की सड़कें बीच से फट चुकी हैं और कभी भी कोई बड़ा गड्ढा (सिंकहोल) बन सकता है। ज़मीन के नीचे का तापमान इतना अधिक है कि ऊपर की सतह भी काफी गर्म रहती है जिससे मिट्टी और पेड़-पौधे कमजोर हो गए हैं।

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सरकार ने छीन लिया ZIP Code

1980 के दशक में जब हालात बेकाबू हो गए तो अमेरिकी सरकार ने यहां के निवासियों को मुआवजा देकर शहर खाली करने का आदेश दिया। प्रशासन ने 1992 में शहर का ज़िप कोड (17927) ही रद्द कर दिया ताकि यह आधिकारिक तौर पर किसी पते के रूप में इस्तेमाल न हो सके। सरकार ने एमिनेंट डोमेन कानून के तहत घरों का मालिकाना हक अपने हाथ में ले लिया।

आखिरी निवासियों के साथ अजीब समझौता

काफी विरोध के बाद 2013 में सरकार ने यहां बचे मुट्ठी भर लोगों के साथ एक समझौता किया। उन्हें ताउम्र वहीं रहने की इजाजत तो मिली लेकिन वे न तो अपना घर बेच सकते हैं और न ही इसे अपने वारिसों को विरासत में दे सकते हैं। उनकी मौत के बाद वह ज़मीन भी सरकारी हो जाएगी।

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