रूस का दोहरा खेल: अफगानिस्तान से बढ़ाई दोस्ती, पाकिस्तान  की उड़ा दी नींद

Edited By Updated: 07 Jun, 2026 12:29 PM

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रूस और तालिबान के बीच बढ़ते सैन्य एवं राजनीतिक संबंध पाकिस्तान के लिए नई चुनौती बनते दिख रहे हैं। मॉस्को एक ओर अफगानिस्तान से आतंकवादी खतरे की चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर तालिबान सरकार के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। इससे पाकिस्तान की क्षेत्रीय...

International Desk:  अफगानिस्तान और रूस के बीच हाल के महीनों में तेजी से बढ़ती नजदीकियां दक्षिण और मध्य एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव ला रही हैं। रूस अब न केवल तालिबान के साथ राजनीतिक संपर्क बढ़ा रहा है, बल्कि सुरक्षा और सैन्य सहयोग को भी मजबूत कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव पाकिस्तान के लिए चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि लंबे समय तक अफगानिस्तान में प्रभाव रखने की उसकी रणनीति अब कमजोर पड़ती दिख रही है।रूस के सुरक्षा प्रमुख Alexander Bortnikov ने मई में आयोजित सीआईएस (कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स) सुरक्षा बैठक में कहा कि Islamic State Khorasan Province मध्य एशियाई देशों और रूस में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों के बीच भर्ती अभियान चला रहा है। उनके अनुसार आतंकवादी नेटवर्क सक्रिय हैं और हमलों की तैयारी भी की जा रही है।

 

दिलचस्प बात यह है कि रूस एक ओर अफगानिस्तान से उत्पन्न आतंकवादी खतरे की बात करता है, जबकि दूसरी ओर तालिबान सरकार के साथ अपने संबंध लगातार मजबूत कर रहा है। यही रूस की मौजूदा रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। मई के अंत में रूस और तालिबान के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए। समझौते पर रूस की ओर से Sergei Shoigu और तालिबान की ओर से Mohammad Yaqoob ने हस्ताक्षर किए।रूस के अफगानिस्तान मामलों के विशेष दूत Zamir Kabulov ने बताया कि सहयोग का मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान में मौजूद रूसी सैन्य उपकरणों की मरम्मत और पुनर्स्थापना होगा। रूस पहले ही तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बन चुका है। इस कदम को क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना गया था।

 

समझौते के बाद तालिबान रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब ने कहा कि भविष्य में कोई भी पड़ोसी देश अफगान क्षेत्र पर पहले जैसी आसानी से हमला नहीं कर सकेगा। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन बयान को व्यापक रूप से पाकिस्तान के संदर्भ में देखा गया। हाल के वर्षों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संबंध लगातार खराब हुए हैं। दोनों देशों के बीच सीमा पर झड़पें हुई हैं और एक-दूसरे पर आतंकवादी समूहों को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं।पाकिस्तान का आरोप है कि Tehreek-e-Taliban Pakistan के लड़ाके अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकानों से पाकिस्तान पर हमले कर रहे हैं। दूसरी ओर तालिबान सरकार पाकिस्तान पर अफगान क्षेत्र में हवाई हमले करने का आरोप लगाती रही है। इसके साथ ही ISKP भी पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। यही कारण है कि रूस अफगानिस्तान को क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है।

 

कई विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की वर्षों पुरानी "स्ट्रैटेजिक डेप्थ" नीति अब उलटी पड़ती दिखाई दे रही है। इस नीति का उद्देश्य अफगानिस्तान में मित्रवत शासन बनाए रखना था ताकि पाकिस्तान अपनी पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।  लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। तालिबान और पाकिस्तान के बीच भरोसा कमजोर हुआ है, सीमा विवाद बढ़े हैं और आतंकवादी गतिविधियां भी चिंता का कारण बनी हुई हैं। रूस, चीन, ईरान और मध्य एशियाई देशों की बढ़ती सक्रियता के बीच अफगानिस्तान एक बार फिर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का केंद्र बनता जा रहा है। रूस का तालिबान के साथ बढ़ता सहयोग यह संकेत देता है कि मॉस्को अब अफगानिस्तान में सीधे प्रभाव बनाना चाहता है और केवल पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहना चाहता। 

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