पाक आर्मी जनरल का सनसनीखेज खुलासा- " चीन ने मुझे बलूच आंदोलन कुचलने के लिए किया तैनात"

Edited By Updated: 01 Feb, 2021 10:37 AM

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पाकिस्तानी सेना के एक जनरल ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया  कि बलूच आजादी आंदोलन को कुचलने में चीन अहम्  भूमिका  निभा...

इंटरनेशनल डेस्कः पाकिस्तानी सेना के एक जनरल ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया  कि बलूच आजादी आंदोलन को कुचलने में चीन अहम्  भूमिका  निभा रहा है। दक्षिणी बलूचिस्तान के नए आईजी एफसी  मेजर जनरल बिलाल ने तुर्बत स्थित एफसी के मुख्यालय में स्थानीय एजेंटों और खुफिया एजेंसियों के साथ एक  विशेष ‘जिरगा’ यानि बैठक  कहा कि चीन ने उन्हें बलूच लोगों द्वारा आजादी के आंदोलन को समाप्त करने के लिए 6 महीने का अल्टीमेटम  दिया है।

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 रिपोर्ट के अनुसार, केच जिले में तैनात मेजर जनरल बिलाल ने अपनी तैनाती और सहायता और अन्य महत्वपूर्ण मामलों में चीन की भूमिका को खुले तौर पर स्वीकार किया है। मेजर जनरल बिलाल ने ‘जिरगा’ में स्वीकार करते हुए कहा कि चीन ने बलूचिस्तान में उन्हें 30 साल के सेवा अनुभव के आधार पर भारी वेतन पर रखा है और बलूच आंदोलन को ‘कुचलने’ के लिए केवल छह महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि उनके पास पिछले 30 वर्षों से बलूचिस्तान में काम करने का व्यापक अनुभव है और उन्होंने क्वेटा, सिबी, कोलवा, डेरा बुगती और अवारन में काम किया है। 

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पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल अयमान बिलाल ने ईरान को पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए कहा कि पाकिस्तान की सेना ईरान के अंदर जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।  पाकिस्तानी सेना के एक जनरल ने कहा कि चीन ने मुझे वेतन और बड़ी राशि का भुगतान किया है और मुझे आधिकारिक तौर पर अपने क्षेत्रीय हितों के लिए और CPEC (चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) के खिलाफ ईरान की साजिशों को विफल करने के लिए यहां तैनात किया है, क्योंकि यह क्षेत्रीय हितों में एक तरह का निवेश है। 

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एफसी की इस विशेष ‘जिरगा’ सत्र में रक्षा उत्पादन मामले के संघीय मंत्री जुबेदा जलाल की बहन रहीमा जलाल, पेडरक से कुर्बानी दस्ते के राज्य प्रमुख सरदार अजीज, राज्य कुर्बानी दस्ते के नागौर दश्त व हासिल कोलवाही प्रमुख यासिर बहराम और टंप, मंड, बुलदा, जमुरान, डैश और होशप में पैरोल पर काम कर रहे सशस्त्र समूहों के प्रमुख भी मौजूद थे।  बता दें कि पिछले दिनों पाकिस्तान द्वारा कई विकास परियोजनाओं के बावजूद बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे गरीब और सबसे कम आबादी वाला प्रांत बना हुआ है। विद्रोही समूहों ने दशकों से प्रांत में एक अलगाववादी विद्रोह को भड़काया है, शिकायत करते हुए कि इस्लामाबाद और अमीर पंजाब प्रांत में केंद्र सरकार उनके संसाधनों का गलत तरीके से शोषण करती है। इस्लामाबाद ने 2005 में प्रांत में सैन्य अभियान शुरू करके उग्रवाद पर प्रतिक्रिया दी।

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