Iran-Israel-US War : जंग के बीच ईरान का 130 साल पुराना हिंदू मंदिर चर्चा में, जानिए इसका इतिहास

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 10:06 PM

130 year old hindu temple in the spotlight amid iran israel us tensions

मिडिल ईस्ट में ईरना,इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। दोनों तरफ से हो रहे हमलों और मिसाइल हमलों के कारण भारी नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच ईरान में रहने वाले हिंदुओं और वहां मौजूद धार्मिक...

इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में ईरना,इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। दोनों तरफ से हो रहे हमलों और मिसाइल हमलों के कारण भारी नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच ईरान में रहने वाले हिंदुओं और वहां मौजूद धार्मिक स्थलों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर ईरान का एक 130 साल पुराना हिंदू मंदिर सुर्खियों में आ गया है।

130 साल पुराना विष्णु मंदिर बना चर्चा का केंद्र

ईरान में हिंदुओं की संख्या बहुत कम है। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, साल 2010 में यहां करीब 20 हजार हिंदू रहते थे। ईरान के बंदर अब्बास शहर में, जो Strait of Hormuz के पास स्थित है, एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर मौजूद है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे लगभग 130 साल पुराना माना जाता है।

इस मंदिर का पुनर्निर्माण साल 1982 में कराया गया था। बताया जाता है कि इसका निर्माण मोहम्मद हसन खान साद-ओल-मालेक ने करवाया था। इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में काम करने वाले भारतीयों ने बनवाया था, जो उस समय व्यापार के सिलसिले में ईरान में रहते थे।

मंदिर की खास बनावट और धार्मिक महत्व

भगवान विष्णु का यह मंदिर अपनी खास बनावट और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। मंदिर के अंदर एक चौकोर कमरा है, जिसके ऊपर बड़ा गुंबद बना हुआ है। इसके निर्माण में मूंगा पत्थर, मोर्टार, मिट्टी और पारंपरिक लुई चाक का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर के अंदर भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीरें भी मौजूद हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां और पूर्ण अवतार माना जाता है।

चाबहार में भी है हिंदू मंदि

ईरान के चाबहार में भी एक हिंदू मंदिर मौजूद है, जिसे मंदिर या मूर्तिघर के रूप में जाना जाता है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण गुजरात से आए हिंदू व्यापारियों ने करवाया था। यह मंदिर 19वीं और 20वीं शताब्दी के आसपास बनाया गया था और इसके निर्माण में भी मूंगा पत्थर और लुई चाक का उपयोग किया गया है।

तेहरान का प्रसिद्ध गुरुद्वारा भी खास

ईरान की राजधानी Tehran में गुरुद्वारा भाई गंगा सिंह सभा नाम का एक प्रसिद्ध गुरुद्वारा भी है। इसका निर्माण साल 1941 में हुआ था और इसे स्थानीय तौर पर “मस्जिद-ए-हिंदन” के नाम से भी जाना जाता है। यहां हर शुक्रवार को लंगर का आयोजन किया जाता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस गुरुद्वारे का दौरा कर चुके हैं। ईरान में सिख समुदाय की संख्या भी काफी कम है, लेकिन यह गुरुद्वारा वहां की सांस्कृतिक विविधता और भारत-ईरान संबंधों का प्रतीक माना जाता है।

युद्ध के बीच बढ़ी धार्मिक स्थलों की चर्चा

ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण अब सिर्फ राजनीतिक और सैन्य हालात ही नहीं, बल्कि वहां के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की भी चर्चा हो रही है। ईरान का यह 130 साल पुराना हिंदू मंदिर और अन्य भारतीय धार्मिक स्थल आज भी वहां की पुरानी सांस्कृतिक विरासत और भारत से जुड़े ऐतिहासिक रिश्तों की कहानी बयां करते हैं।

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!