Edited By Tanuja,Updated: 15 Mar, 2026 12:51 PM

चीन द्वारा रिफाइनरियों को ईंधन निर्यात रोकने के निर्देश के बाद ऑस्ट्रेलिया में जेट ईंधन की कमी और महंगे हवाई किराए का खतरा बढ़ गया है। पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हमलों से तेल आपूर्ति अस्थिर हो गई है, जिससे वैश्विक विमानन क्षेत्र...
International Desk: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति संकट के बीच चीन के एक फैसले ने ऑस्ट्रेलिया की विमानन व्यवस्था को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार चीन ने अपनी तेल रिफाइनरियों को सभी ईंधन निर्यात रोकने के निर्देश दिए हैं। इससे ऑस्ट्रेलिया में जेट ईंधन की कमी और हवाई किराए में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। ऑस्ट्रेलिया के उद्योग, विज्ञान और संसाधन विभाग के अनुसार मार्च 2026 के मध्य तक देश के पास लगभग 29 से 32 दिनों का जेट ईंधन भंडार है, जो करीब 80.2 करोड़ लीटर के बराबर है। यदि नई आपूर्ति समय पर नहीं आती तो हवाई अड्डों पर ईंधन तेजी से खत्म हो सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई अखबार ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू के मुताबिक, चीन के इस कदम के कारण ऑस्ट्रेलिया के लिए भेजे जा रहे कम से कम दो ईंधन मालवाहकों पर अनिश्चितता पैदा हो गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर पहले से ही वैश्विक बाजार अस्थिर हैं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक Strait of Hormuz में हाल ही में दो परिवहन जहाजों को नष्ट कर दिया गया, जिससे क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर यह स्थिति जारी रहती है तो एशिया की रिफाइनरियों को कच्चे तेल की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। एशियाई देशों को अपने तेल का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से मिलता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया खुद तरल ईंधन का शुद्ध आयातक है और एशियाई रिफाइनरियों से होने वाले निर्यात पर काफी निर्भर है।
2025 में ऑस्ट्रेलिया ने अपने जेट ईंधन का लगभग 32 प्रतिशत चीन से आयात किया था, इसलिए चीन द्वारा निर्यात रोकना ऑस्ट्रेलिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख एयरलाइन Qantas ने संकेत दिया है कि ईंधन महंगा होने पर हवाई किराए बढ़ाने पड़ सकते हैं, हालांकि फिलहाल उड़ानें रद्द नहीं की गई हैं। वहीं Air New Zealand पहले ही ईंधन कीमतों और आपूर्ति समस्याओं के कारण लगभग 1,100 उड़ानें कम करने की घोषणा कर चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति लंबी चली तो निकट भविष्य में हवाई किराए में तेज बढ़ोतरी, ईंधन अधिभार,
उड़ानों की संख्या में कमी और उड़ानों के रद्द होने जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।