ईरान युद्ध से अरबों की कमाई का सपना टूटा! यूक्रेन ने रूस का खेल कैसे बिगाड़ा?

Edited By Updated: 27 Mar, 2026 10:58 PM

dream of earning billions from iran war shattered

ईरान युद्ध के दौरान रूस की अरबों रुपये कमाने की योजना पर यूक्रेन ने पानी फेर दिया है। यूक्रेन ने रूस के अहम तेल ठिकानों पर बड़े ड्रोन हमले किए, जिससे उसकी कमाई पर सीधा असर पड़ा है।

इंटरनेशनल डेस्कः ईरान युद्ध के दौरान रूस की अरबों रुपये कमाने की योजना पर यूक्रेन ने पानी फेर दिया है। यूक्रेन ने रूस के अहम तेल ठिकानों पर बड़े ड्रोन हमले किए, जिससे उसकी कमाई पर सीधा असर पड़ा है। यूक्रेन ने इस साल का सबसे बड़ा हमला उस्त-लुगा तेल बंदरगाह पर किया, जहां तेल के टैंक और लोडिंग मशीनें जलकर खाक हो गईं। आग इतनी भीषण थी कि उसका धुआं फिनलैंड तक दिखाई दिया। यूक्रेन के ड्रोन करीब 620 मील दूर से उड़कर आए और ब्रायंस्क, स्मोलेंस्क, प्सकोव और सेंट पीटर्सबर्ग के एयर डिफेंस सिस्टम को पार करते हुए सीधे निशाने पर पहुंचे।

यह हमला केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक भी था। रूस की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस पर निर्भर है। उसके 60% से ज्यादा निर्यात और करीब एक-तिहाई सरकारी कमाई इसी सेक्टर से आती है। ऐसे में इन ठिकानों पर हमले का सीधा असर उसके खजाने पर पड़ा है।

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद रूस को बड़ा फायदा मिल रहा था। तेल की कीमतें बढ़ने से रूस रोज करीब 760 मिलियन डॉलर कमा रहा था और मार्च में उसकी कुल कमाई करीब 24 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी। इससे पहले उसकी आय 47% तक गिर चुकी थी और बजट घाटा 2026 के लक्ष्य का 91% तक पहुंच गया था।

लेकिन यूक्रेन के ताजा हमलों ने इस कमाई को बड़ा झटका दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हालिया हमलों के बाद रूस की करीब 40% तेल निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है जो उसके इतिहास का सबसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है। उस्त-लुगा और प्रिमोर्स्क जैसे प्रमुख बंदरगाह, जो रोजाना करीब 17 लाख बैरल तेल संभालते हैं, उन्हें बंद करना पड़ा। इसके अलावा किरीशी, यारोस्लाव, मॉस्को और रियाज़ान की रिफाइनरियों पर भी असर पड़ा है, जिससे रोज करीब 4 लाख बैरल तेल सप्लाई खतरे में आ गई है।

रूसी टैंकर भी बना निशाना

यूक्रेन ने इस्तांबुल के पास एक रूसी तेल टैंकर को भी निशाना बनाया, जिसमें करीब 10 लाख बैरल तेल भरा था। अब यूक्रेन पूरे तेल नेटवर्क रिफाइनरी, पाइपलाइन और शिपिंग को निशाना बना रहा है।

इन हमलों में यूक्रेन सस्ते लेकिन ताकतवर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। FP-1 जैसे ड्रोन की कीमत करीब 40,000 पाउंड होती है और ये 60 से 120 किलो तक विस्फोटक ले जा सकते हैं। ये करीब 995 मील तक उड़ान भर सकते हैं और रडार से बचने के लिए खास तकनीक से लैस होते हैं।

यूक्रेन का मकसद साफ है, रूस की कमाई को कम करना ताकि वह युद्ध पर कम खर्च कर सके। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे रूस पूरी तरह कमजोर नहीं होगा, क्योंकि उसके पास एशिया में तेल बेचने के अन्य विकल्प अभी भी मौजूद हैं। फिर भी, यूक्रेन के ये हमले रूस के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।

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