Edited By Rohini Oberoi,Updated: 07 Sep, 2026 12:09 PM
फ्रांस की राजधानी पेरिस में रविवार को एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हुई। शहर में देश के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर का आधिकारिक उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। BAPS स्वामीनारायण संस्था के आध्यात्मिक गुरु, महंत स्वामी...
फ्रांस : फ्रांस की राजधानी पेरिस में रविवार को एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हुई। शहर में देश के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर का आधिकारिक उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। BAPS स्वामीनारायण संस्था के आध्यात्मिक गुरु, महंत स्वामी महाराज की अगुवाई में पवित्र वैदिक मंत्रों के बीच भगवान की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
यह ऐतिहासिक अवसर 13 दिनों से चल रहे भव्य उद्घाटन उत्सव का समापन था जिसमें भारत, अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड सहित दुनिया के 40 से अधिक देशों के श्रद्धालुओं और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। सुबह के समय पवित्र वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच महंत स्वामी महाराज ने मूर्ति-प्रतिष्ठा की शुभ रस्में पूरी कीं।
इस समारोह में श्री अक्षर-पुरुषोत्तम महाराज, श्री घनश्याम महाराज, श्री राधा-कृष्ण भगवान, श्री सीता-राम भगवान (साथ में श्री लक्ष्मणजी और श्री हनुमानजी महाराज), श्री पार्वती-शंकर भगवान (साथ में श्री कार्तिकेयजी और श्री गणेशजी महाराज), श्री पद्मावती वेंकटेश्वर भगवान, श्री अयप्पा स्वामीजी, श्री नीलकंठ वर्णी महाराज (भगवान स्वामीनारायण का स्वरूप) और गुरु परंपरा की पवित्र मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
प्राण-प्रतिष्ठा के बाद, महंत स्वामी महाराज ने मंदिर में पहली प्रार्थना की। यह प्रार्थना सभी धर्मों के बीच आपसी प्रेम और सद्भाव, वैश्विक शांति और सभी की भलाई के लिए की गई थी। प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से पहले, पेरिस की सड़कों पर एक भव्य नगर यात्रा निकाली गई जिसमें भारतीय संगीत, कला और भक्ति परंपराओं की झलक देखने को मिली।
इस जुलूस में पारंपरिक वेशभूषा पहने कलाकारों के साथ 14 सुंदर ढंग से सजाई गई झांकियां शामिल थीं। हिंदू देवी-देवताओं के दिव्य स्वरूपों को दर्शाने वाली सजी-धजी मूर्तियों को फ्रांस की राजधानी के प्रमुख रास्तों से ले जाया गया। यह नगर यात्रा दुनिया भर में मशहूर एफिल टॉवर और इकोले मिलिटेयर जैसी जगहों से गुजरी और अंत में प्लेस डे ला कॉनकॉर्ड पर समाप्त हुई।
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प्रेम और सद्भाव का संदेश देने वाले इस आध्यात्मिक जुलूस ने फ्रांस में भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के जश्न के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत की। पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और फ्रांसीसी इंजीनियरिंग का अनूठा संगम। यह नया मंदिर प्राचीन भारतीय वास्तुकला और पारंपरिक वैदिक शिल्पशास्त्र के अनुसार बनाया गया हैं साथ ही इसमें आधुनिक फ्रेंच इंजीनियरिंग और निर्माण तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया है।
यह मंदिर 5,000 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। इसके ऊपरी हिस्से में पारंपरिक मंदिर है जबकि इसके आधार पर बनी एक सुंदर हवेली सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर काम करती है। इसके निर्माण में भारत, इटली, ग्रीस और वियतनाम से लाए गए संगमरमर के साथ-साथ ग्वालियर के बलुआ पत्थर (सैंडस्टोन) का इस्तेमाल किया गया है।
इस ढांचे में पांच शिखर, 10 बड़े गुंबद, नक्काशीदार 20 खंभे, 120 गवाक्ष (छोटी खिड़कियां), 49 नक्काशीदार चरित्र आकृतियां और चार सजावटी छतरियां हैं। मंदिर परिसर में एक सभा कक्ष, कक्षाएं, स्पोर्ट्स रूम, प्रदर्शनी स्थल और कार्यालय भी शामिल हैं। पेरिस में एक भव्य मंदिर बनाने का संकल्प सबसे पहले 1970 में गुरु योगीजी महाराज ने लिया था।
उनके उत्तराधिकारी, प्रमुख स्वामी महाराज ने विदेशों में अपनी आध्यात्मिक यात्राओं के दौरान इस सोच को आगे बढ़ाया और फ्रांस में सत्संग की नींव रखने में मदद की। मंदिर के लिए भूमि पूजन समारोह 2021 में वरिष्ठ स्वामियों की उपस्थिति में हुआ जिसके बाद 2022 में शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया। मंदिर का निर्माण 2026 में पूरा हुआ।
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फ्रांस की धरती पर स्थापित यह देश का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है। इसका मकसद दुनिया भर के लोगों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना है। इस मंदिर को पूजा, प्रेम, सद्भाव और एकता के जीवंत प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से यह वैश्विक कल्याण और आपसी सद्भाव का संदेश देता रहेगा।
रविवार को हुए प्राण-प्रतिष्ठा समारोह ने मंदिर के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत की। इसने आगंतुकों और श्रद्धालुओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं और फ्रांस तथा यूरोप को एक अनूठा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उपहार दिया है।