Edited By Rahul Singh,Updated: 19 Sep, 2026 02:53 PM

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर को ईमान मजारी-हजीर और हादी अली चट्ठा को जमानत दे दी थी और उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। दोनों करीब आठ महीने से हिरासत में थे। दोनों को 23 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।
कराची : पाकिस्तान में मानवाधिकार मामलों की पैरवी करने वाले वकील ईमान मजारी-हजीर और हादी अली चट्ठा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के कुछ ही घंटे बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई पर Amnesty International ने कड़ी आपत्ति जताई है। Amnesty International के दक्षिण एशिया के डिप्टी रीजनल डायरेक्टर बाबू राम पंत ने कहा कि ईमान और हादी की दोबारा गिरफ्तारी से यह सवाल उठता है कि उनके खिलाफ लगाए गए मामले कहीं उनके मानवाधिकार से जुड़े काम को रोकने की कोशिश तो नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की ओर से आलोचनात्मक आवाजों को दबाने के लिए कानूनी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बाबू राम पंत ने कहा कि दोनों वकीलों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लगाए गए नए आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से न्याय व्यवस्था के कथित दुरुपयोग को रोकने और ईमान व हादी को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दोनों को अपने परिवार और दोस्तों से मिलने और मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों की पैरवी करने की आजादी मिलनी चाहिए।
दरअसल, पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर को ईमान मजारी-हजीर और हादी अली चट्ठा को जमानत दे दी थी और उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। दोनों करीब आठ महीने से हिरासत में थे। दोनों को 23 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। इसके अगले ही दिन उन्हें 10 से 17 साल तक की जेल की सजा सुनाई गई थी। यह सजा Prevention of Electronic Crimes Act (PECA) की अलग-अलग धाराओं के तहत सुनाई गई थी। उन पर सोशल मीडिया पर अधिकारियों की आलोचना करने वाली पोस्ट करने के आरोप लगाए गए थे।
17 सितंबर की रात करीब 9:30 बजे, जब दोनों की रिहाई की कागजी प्रक्रिया चल रही थी, तभी उन्हें रावलपिंडी की अदियाला जेल के अंदर से पुलिस हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद उन्हें आतंकवाद विरोधी अदालत के जज के सामने पेश किया गया। अदालत ने दोनों को 14 दिनों के रिमांड पर फिर से अदियाला जेल भेजने का आदेश दिया। यह मामला 22 मार्च 2025 को दर्ज किया गया था। दोनों पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर 'सरकार विरोधी नारे' लगाने और सड़क रोकने के आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ पाकिस्तान पीनल कोड की धारा 188, 341, 506, 353 और 186 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा उन पर Anti-Terrorism Act की धारा 7 भी लगाई गई है। Amnesty International का कहना है कि पाकिस्तान के अधिकारियों को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आलोचनात्मक आवाजों को निशाना बनाने के लिए न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।