Edited By Rohini Oberoi,Updated: 08 Mar, 2026 01:40 PM

ईरान और इस्राइल के बीच छिड़ी जंग अब केवल मिसाइलों तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने खाड़ी देशों की थाली पर भी हमला बोल दिया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुबई में ताजे फल और सब्जियों का संकट खड़ा हो गया...
Dubai Food Crisis Iran Israel War Impact : ईरान और इस्राइल के बीच छिड़ी जंग अब केवल मिसाइलों तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने खाड़ी देशों की थाली पर भी हमला बोल दिया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुबई में ताजे फल और सब्जियों का संकट खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार दुबई के पास ताजे खाद्य पदार्थों का स्टॉक अब चंद दिनों का ही बचा है।
सिर्फ 8 दिन की मोहलत?
लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट्स और सप्लाई चेन डेटा के अनुसार दुबई में ताजे खाने-पीने के सामान की भारी किल्लत देखी जा रही है। स्विस ब्रॉडकास्टर SRF की रिपोर्ट और लॉजिस्टिक्स चीफ स्टीफन पॉल के आंकड़ों के मुताबिक 7 मार्च 2026 तक दुबई के पास ताजी फल-सब्जियों का केवल 8 दिन का स्टॉक शेष रह गया था। खाड़ी देश अपनी जरूरत का 80 से 90 प्रतिशत भोजन आयात (Import) करते हैं। इस रसद का लगभग 70% हिस्सा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से होकर गुजरता है जिसे युद्ध के चलते ईरान ने ब्लॉक कर दिया है।

आसमान से भी कटी रसद
सिर्फ समुद्री मार्ग ही नहीं बल्कि ईरान और इस्राइल के बीच जारी मिसाइल हमलों और हवाई युद्ध के कारण एयर कार्गो (Air Freight) पर भी बुरा असर पड़ा है। इसके चलते फल-सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों की डिलीवरी समय पर नहीं हो पा रही है।
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सरकार का आश्वासन: घबराएं नहीं, हमारे पास है बैकअप
हालांकि 8 दिनों के इस दावे के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकार और वित्त मंत्रालय ने जनता को शांत रहने की अपील की है। सरकार का दावा है कि उनके पास आवश्यक वस्तुओं (अनाज आदि) का 4 से 6 महीने का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

लुलु ग्रुप (Lulu Group) जैसे बड़े रिटेलर्स ने सप्लाई चेन को टूटने से बचाने के लिए विशेष चार्टर्ड विमानों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। यूएई अब भारत जैसे देशों से हवाई मार्ग के जरिए ताजी सब्जियां और फल मंगाने की कोशिशों में जुट गया है ताकि बाजार में स्टॉक बना रहे।

विशेषज्ञों की चेतावनी
एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर अगले एक हफ्ते में समुद्री व्यापार मार्ग (Shipping Lanes) नहीं खुले तो ताजी रसद की कीमतें आसमान छू सकती हैं और बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन सकता है।