Edited By Tanuja,Updated: 13 Jan, 2026 11:36 AM

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल बंद कर दी गई थीं। अब कुछ ईरानी विदेश कॉल करने में सफल हुए हैं, लेकिन इंटरनेट अब भी ठप है। इस बीच अमेरिका-ईरान के बीच गुप्त संवाद, ट्रंप की चेतावनी और सड़कों पर सत्ता समर्थक...
International Desk: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई के बाद पूरी तरह ठप किया गया संचार तंत्र अब आंशिक रूप से बहाल होने लगा है। मंगलवार को ईरान में कुछ मोबाइल फोन से विदेश कॉल संभव हो सकीं, हालांकि इंटरनेट अब भी बाहरी दुनिया से कटा हुआ है। ईरान में इंटरनेट शटडाउन को अब 100 घंटे पूरे हो चुके हैं। वैश्विक इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स (NetBlocks) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ईरान इस वक्त पूरी तरह से इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति में है। रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में मोबाइल डेटा सेवाएं और कॉलिंग पूरी तरह बंद हैं।
इसके अलावा इंटरनेट इस्तेमाल के अन्य वैकल्पिक माध्यमों को भी जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोग वीपीएन (Virtual Private Network) के जरिए भी इंटरनेट से जुड़ नहीं पा रहे, क्योंकि नेटवर्क स्तर पर ही कनेक्टिविटी काट दी गई है। तेहरान में मौजूद कई लोगों ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) से फोन पर संपर्क किया, लेकिन दुबई स्थित एपी कार्यालय उन नंबरों पर दोबारा कॉल नहीं कर सका। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इंटरनेट सेवाएं अभी भी बंद हैं और सोशल मीडिया तथा मैसेजिंग ऐप्स तक पहुंच नहीं मिल रही है। ईरानी प्रशासन ने बीते गुरुवार को जैसे ही देशभर में प्रदर्शन तेज़ हुए, इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल दोनों बंद कर दी थीं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 646 लोगों की मौत हो चुकी है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान, प्रदर्शनकारियों पर दमन को लेकर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की धमकी के बाद, वॉशिंगटन से बातचीत करना चाहता है। ट्रंप ने हालांकि यह भी साफ किया कि अगर ज़रूरत पड़ी तो सैन्य विकल्प से पीछे नहीं हटेंगे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कतर समर्थित टीवी चैनल अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ उनका संपर्क बना हुआ है प्रदर्शनों से पहले भी और बाद में भी। हालांकि उन्होंने कहा कि “वॉशिंगटन के प्रस्ताव और धमकियां हमारे देश के लिए अस्वीकार्य हैं।”
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलिन लेविट ने भी माना कि ईरान के सार्वजनिक बयान और निजी संदेशों में अंतर है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इन संदेशों को गंभीरता से परख रहे हैं, लेकिन सैन्य विकल्प हमेशा खुले हैं। इधर, सोमवार को सरकार समर्थक हजारों लोग सड़कों पर उतरे और सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन किया। ईरानी सरकारी टीवी ने भीड़ के नारे दिखाए अमेरिका को मौत”, “इज़राइल को मौत” और “खुदा के दुश्मनों को मौत”। ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनों में शामिल लोगों को “खुदा का दुश्मन” माना जाएगा यह ऐसा आरोप है, जिसकी सज़ा मौत तक हो सकती है।