इस वजह से खामेनेई ने 45 साल तक छिपाकर रखा अपना दाहिना हाथ, सच्चाई जानकर रह जाएंगे दंग

Edited By Updated: 03 Mar, 2026 12:31 PM

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ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने करीब 45 वर्षों तक अपना दाहिना हाथ सार्वजनिक रूप से छिपाकर रखा। इसकी वजह 1981 में हुआ एक बम हमला था, जिसमें उनका दाहिना हाथ गंभीर रूप से घायल होकर लकवाग्रस्त हो गया था। हालांकि इस शारीरिक कमजोरी के बावजूद...

नेशनल डेस्क : ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई का हाल ही में हुए एक हमले में निधन हो गया। सरकारी प्रसारक IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) ने उनकी मौत की पुष्टि की। वे 86 वर्ष के थे और करीब 35 साल तक देश के सुप्रीम लीडर के पद पर रहे। उनकी मृत्यु को ईरान की राजनीति और सत्ता व्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सार्वजनिक जीवन में सधा हुआ व्यक्तित्व

आयतुल्ला खामेनेई हमेशा सार्वजनिक मंचों पर शांत और संतुलित नजर आते थे। वे अक्सर अपने दाहिने हाथ को चादर या ढीले वस्त्रों के भीतर रखते थे। बहुत कम लोग जानते थे कि इसके पीछे एक गंभीर कारण था। दरअसल, 1981 में हुए एक हमले में उनका दाहिना हाथ बुरी तरह घायल हो गया था, जिसके बाद वह लगभग निष्क्रिय हो गया।

1981 का जानलेवा हमला

27 जून 1981 को तेहरान की एक मस्जिद में उन पर हमला हुआ था। उस समय वे ईरान के राष्ट्रपति थे। जानकारी के अनुसार, वे नमाज के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान एक टेप रिकॉर्डर में छिपाए गए बम में विस्फोट हुआ। धमाके में उन्हें गंभीर चोटें आईं। इस हमले की जिम्मेदारी उस समय के एक उग्रवादी संगठन ‘फुरकान ग्रुप’ ने ली थी, जो धार्मिक नेतृत्व का विरोध करता था।

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दाहिने हाथ पर स्थायी असर

इस विस्फोट में खामेनेई के दाहिने हाथ, फेफड़ों और आवाज की नसों को गहरा नुकसान पहुंचा। कई महीनों तक उनका इलाज चला। जान तो बच गई, लेकिन उनका दाहिना हाथ लकवाग्रस्त हो गया। यही वजह थी कि वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में उस हाथ को छिपाकर रखते थे।

बाएं हाथ से की नई शुरुआत

हमले के बाद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने बाएं हाथ से लिखना और काम करना सीखा। उन्होंने एक बार कहा था कि अगर दिमाग और जुबान सही तरह से काम करें, तो वही काफी है। इस बयान से यह साफ था कि वे अपनी शारीरिक कमजोरी को कभी बाधा नहीं बनने देना चाहते थे।

35 साल तक सर्वोच्च नेतृत्व

1989 में वे ईरान के सुप्रीम लीडर बने। यह पद देश में सबसे शक्तिशाली माना जाता है, जो राष्ट्रपति से भी ऊपर है। सेना, न्यायपालिका और कई अहम संस्थाओं पर उनका सीधा प्रभाव था। उन्होंने लंबे समय तक देश की राजनीति, सुरक्षा नीति और विदेश नीति पर मजबूत पकड़ बनाए रखी।

विदेश नीति और वैश्विक भूमिका

खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के रिश्तों, क्षेत्रीय राजनीति और पश्चिम एशिया की रणनीति में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में ईरान ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दिया और क्षेत्रीय मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई।

स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद सक्रियता

1981 के हमले में फेफड़ों और आवाज की नसों को नुकसान पहुंचने के बावजूद वे वर्षों तक भाषण देते रहे और राजनीतिक बैठकों का नेतृत्व करते रहे। शारीरिक सीमाओं के बावजूद उनका प्रभाव और राजनीतिक पकड़ कमजोर नहीं पड़ी।आयतुल्ला अली खामेनेई का लंबा राजनीतिक जीवन ईरान के आधुनिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय रहा। उनकी मृत्यु के बाद देश में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।


 

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