लेबनान में इजराइली ड्रोन का 'खूनी' तांडव: हाइवे पर दौड़ते वाहनों को बनाया निशाना, एक महिला और बच्चों समेत 12 की मौत

Edited By Updated: 14 May, 2026 06:10 AM

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को लेबनान में इजराइली ड्रोन हमलों ने एक बार फिर भीषण तबाही मचाई, जिसमें एक महिला और उसके दो बच्चों सहित 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है।

बेरुत/यरूशलेम: मिडिल ईस्ट में जारी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को लेबनान में इजराइली ड्रोन हमलों ने एक बार फिर भीषण तबाही मचाई, जिसमें एक महिला और उसके दो बच्चों सहित 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इजराइली सेना ने इस बार राजधानी बेरुत को दक्षिणी बंदरगाह शहर सिडोन से जोड़ने वाले मुख्य राजमार्ग को निशाना बनाया, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

सड़क पर दौड़ते वाहनों पर बरसी 'आसमान से आग'
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बुधवार को इजराइली ड्रोन ने कुल सात वाहनों को निशाना बनाया। इनमें से तीन हमले बेरुत के दक्षिण में स्थित मुख्य हाईवे पर हुए, जबकि एक हमला सादियात शहर के नजदीक किया गया। हमले इतने अचानक और भीषण थे कि वाहनों में सवार लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रत्येक वाहन में कितने लोग सवार थे।

इजराइल की चेतावनी और हिज्बुल्ला का पलटवार
इजराइली सेना का दावा है कि उसने दक्षिणी लेबनान के विभिन्न इलाकों में स्थित हिज्बुल्ला के ठिकानों को तबाह करने के लिए यह कार्रवाई की है। इस हमले से कुछ घंटे पहले ही इजराइल ने छह गांवों के निवासियों को तुरंत जगह खाली करने के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर, हिज्बुल्ला ने भी हार नहीं मानी है और दावा किया है कि उसने इजराइली सेना पर पलटवार करते हुए कई ड्रोन हमले किए हैं।

शांति समझौते को ठेंगा: संघर्षविराम के बावजूद जारी है खून-खराबा
हैरानी की बात यह है कि अमेरिका की मध्यस्थता में 17 अप्रैल को हुए संघर्षविराम समझौते के बावजूद दोनों ओर से हमले थम नहीं रहे हैं। इजराइल और लेबनान के बीच 1948 से चला आ रहा यह विवाद अब और गहराता जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में आज वाशिंगटन में टिकी निगाहें
लगातार जारी हिंसा के बीच, शांति की एक आखिरी उम्मीद अब वाशिंगटन में होने वाली प्रत्यक्ष वार्ता पर टिकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन दोनों पड़ोसी देशों के बीच शांति बहाली के लिए भारी दबाव बना रहा है। गुरुवार को होने वाले इस वार्ता के दौर पर पूरी दुनिया की नजरें हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन इस खूनी संघर्ष को रोकने में कामयाब हो पाएगा।

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