Edited By Tanuja,Updated: 22 Jun, 2026 07:05 PM

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान के साथ शांति वार्ता ने स्थायी समझौते की मजबूत नींव रखी है। अमेरिका कुछ जमे हुए ईरानी फंड जारी करने पर विचार कर सकता है, जिनका उपयोग अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने में किया जाएगा। स्विट्जरलैंड में...
International Desk: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान के साथ हालिया शांति वार्ता ने दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते की दिशा में “मजबूत नींव” तैयार कर दी है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका कुछ जमे हुए ईरानी फंड को जारी करने पर विचार कर सकता है, बशर्ते उनका इस्तेमाल अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद के लिए किया जाए। स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद पत्रकारों से बातचीत में वेंस ने कहा, “अंतिम समझौता अभी बाकी है, लेकिन हम उसकी मजबूत बुनियाद रखने में सफल रहे हैं। हमने घर नहीं बनाया है, लेकिन उसकी नींव जरूर रख दी है।”
वेंस ने बताया कि अमेरिकी प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसके तहत प्रतिबंधों में राहत मिलने के बाद उपलब्ध होने वाली कुछ ईरानी धनराशि का उपयोग अमेरिकी सोयाबीन, मक्का और गेहूं खरीदने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह विचार राष्ट्रपतिजेरेड कुशनर और कतर के अधिकारियों के बीच चर्चा से सामने आया। प्रस्ताव के अनुसार, इस प्रक्रिया की निगरानी कतर करेगा ताकि धन का उपयोग केवल मानवीय और खाद्य जरूरतों के लिए हो। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि राजनीतिक स्तर की बैठक समाप्त हो गई है, लेकिन तकनीकी वार्ताएं इस सप्ताह भी जारी रहेंगी। मध्यस्थों ने बातचीत में हुई प्रगति को “उत्साहजनक” बताया है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वार्ता में होरमुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखने और दक्षिणी लेबनान में इजरायल तथा हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष विराम बनाए रखने के लिए तंत्र विकसित करने पर भी चर्चा हुई। हालांकि वार्ता के दौरान तनाव भी देखने को मिला। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की कुछ टिप्पणियों को लेकर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने असंतोष जताया और बातचीत अस्थायी रूप से प्रभावित हुई। बाद में वार्ता फिर शुरू हो गई।
पिछले सप्ताह हुए अंतरिम समझौते के तहत दोनों देशों को अगले 60 दिनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य, प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए फंड जैसे मुद्दों पर अंतिम समझौते तक पहुंचने का लक्ष्य दिया गया है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने दोहराया है कि उनका देश यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। वहीं अमेरिका चाहता है कि परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित रहे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वर्तमान वार्ता सफल रहती है, तो यह न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों में सुधार ला सकती है, बल्कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।