Edited By Anu Malhotra,Updated: 23 Feb, 2026 01:12 PM

उत्तर कोरिया की राजनीति में इस वक्त एक बड़ा बदलाव पूरी दुनिया को हैरान कर रहा है। तानाशाह किम जोंग उन ने अपनी महज 13 साल की बेटी, किम जू ए को देश की सबसे पावरफुल कुर्सी पर बिठा दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अब उत्तर कोरिया के मिसाइल निर्माण विभाग...
इंटरनेशनल डेस्क: उत्तर कोरिया की राजनीति में इस वक्त एक बड़ा बदलाव पूरी दुनिया को हैरान कर रहा है। तानाशाह किम जोंग उन ने अपनी महज 13 साल की बेटी, किम जू ए को देश की सबसे पावरफुल कुर्सी पर बिठा दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अब उत्तर कोरिया के मिसाइल निर्माण विभाग (Missile Department) की जिम्मेदारी उनकी बेटी संभालेगी, यह वही विभाग है जो अमेरिका और जापान जैसे दुश्मनों की नींद उड़ाने वाले घातक हथियारों को तैयार करता है।
पहचान छिपाने के लिए बदला गया नाम
हैरान करने वाली बात यह है कि इस बड़ी जिम्मेदारी को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए किम ने अपनी बेटी का नाम तक बदल दिया है. अब उन्हें 'किम जू ए' के बजाय 'किम जू हे' के नाम से पुकारा जा रहा है. यह रणनीति कुछ वैसी ही है, जैसी खुद किम जोंग उन के वक्त अपनाई गई थी। जब 2009 में उन्हें उत्तराधिकारी चुना गया था, तब उनका नाम 'किम जोंग वून' से बदलकर 'किम जोंग उन' कर दिया गया था। अब बेटी के साथ भी वही इतिहास दोहराया जा रहा है।
मौत की सजा देने वाले विभाग की 'बॉस' बनीं जू ए
उत्तर कोरिया के लिए मिसाइल विभाग का महत्व सबसे ऊपर है। यहां हर साल लगभग 50 मिसाइलें बनाई जाती हैं और किम के पास 3000 से ज्यादा मिसाइलों का खतरनाक भंडार है। इस विभाग में काम करने वाले अधिकारियों की जान हमेशा जोखिम में रहती है, क्योंकि काम में ज़रा सी चूक होने पर किम उन्हें सीधे मौत की सजा देने के लिए जाने जाते हैं। अब इतनी सख्त और खतरनाक जगह की कमान अपनी बेटी को सौंपना साफ इशारा करता है कि किम उन्हें भविष्य के शासक के तौर पर तैयार कर रहे हैं।
लग्जरी और कड़ाई के बीच तैयार हो रही है वारिस
साल 2013 में जन्मी किम जू ए पहली बार 2022 में सार्वजनिक तौर पर नजर आई थीं। उन्हें उत्तर कोरिया में बहुत सम्मान दिया जाता है और अक्सर 'सम्मानित संतान' कहकर पुकारा जाता है। जू ए को घुड़सवारी और स्कीइंग का बेहद शौक है, लेकिन उनकी असली ट्रेनिंग उनके पिता खुद ले रहे हैं। किम अपनी बेटी को कूटनीति, शिष्टाचार और देश चलाने के गुण सिखा रहे हैं ताकि आने वाले वक्त में वह पूरी मजबूती के साथ उत्तर कोरिया की कमान संभाल सकें।