Edited By Tanuja,Updated: 05 Jan, 2026 07:29 PM

वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर कहा कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड चाहिए। रूस-चीन की आर्कटिक मौजूदगी का हवाला देते हुए ट्रंप के बयान पर डेनमार्क ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे धमकी बताया।
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर विवादित बयान देकर अंतर्राष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है। वेनेजुएला में हुए अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन, जिसमें निकोलस मादुरो को पकड़े जाने का दावा किया गया, उसके ठीक एक दिन बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद ज़रूरी है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी अमेरिका के लिए खतरा है। उन्होंने दावा किया, “ग्रीनलैंड इस समय बेहद रणनीतिक है। वहां रूसी और चीनी जहाज़ हर तरफ हैं। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से ग्रीनलैंड चाहिए और डेनमार्क इसे संभाल नहीं सकता।”
ट्रंप ने यहां तक कहा कि यूरोपीय संघ भी चाहता है कि अमेरिका ग्रीनलैंड का नियंत्रण संभाले, हालांकि इस दावे का कोई आधिकारिक समर्थन सामने नहीं आया है।ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है और ट्रंप पहले भी इसे अमेरिका में शामिल करने की इच्छा जता चुके हैं। अमेरिका का तर्क रहा है कि ग्रीनलैंड की आर्कटिक स्थिति और दुर्लभ खनिज संसाधन उसे सामरिक रूप से बेहद अहम बनाते हैं।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड का तीखा विरोध
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने ट्रंप के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्ज़े की बात करना बिल्कुल भी समझ में नहीं आता। अमेरिका को डेनमार्क साम्राज्य के किसी भी हिस्से को हथियाने का कोई अधिकार नहीं है।”उन्होंने ट्रंप से धमकी भरे बयानों को तुरंत बंद करने की अपील की और कहा कि ग्रीनलैंड और वहां के लोग साफ तौर पर कह चुके हैं कि वे बिकाऊ नहीं हैं।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने भी कहा कि उनका देश लोकतांत्रिक है और उसका भविष्य सोशल मीडिया पोस्ट या बाहरी दबाव से तय नहीं होगा। तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी उप राष्ट्रपति के सहयोगी की पत्नी द्वारा सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे के रंग में दिखाते हुए “SOON” लिखी तस्वीर पोस्ट की गई, जिसे डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपमानजनक बताया।इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड को लेकर भी ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीति अमेरिका और उसके पुराने NATO सहयोगियों के बीच नया तनाव बिंदु बनती जा रही है।