Edited By Parveen Kumar,Updated: 14 Jan, 2026 09:05 PM

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर आज भी कोई फैसला नहीं हो पाया। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई एक बार फिर टाल दी गई है, जिससे लंबे समय से चला आ रहा कानूनी और राजनीतिक सस्पेंस और गहरा गया है।
नेशनल डेस्क: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने आज भी कोई निर्णय नहीं सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में दूसरी बार फैसला टालते हुए अनिश्चितता और बढ़ा दी है। इससे पहले 9 जनवरी को भी इस केस पर सुनवाई के बावजूद कोई फैसला नहीं आया था। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि अगली सुनवाई कब होगी या अंतिम फैसला किस तारीख को सुनाया जाएगा।
आज सुप्रीम कोर्ट ने तीन अन्य मामलों में फैसले जरूर सुनाए, लेकिन टैरिफ से जुड़े इस अहम केस पर न तो कोई बहस हुई और न ही कोई संकेत दिया गया कि आगे की प्रक्रिया क्या होगी। ऐसे में यह मामला अभी अधर में लटका हुआ है।
यह केस इस सवाल के इर्द-गिर्द घूमता है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों से आगे बढ़ते हुए अमेरिका के लगभग सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर 10 से 50 फीसदी तक के टैरिफ एकतरफा रूप से लगाए। ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफ को जायज ठहराने के लिए 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का सहारा लिया और व्यापार घाटे तथा फेंटेनाइल जैसे अवैध ड्रग्स की तस्करी को “राष्ट्रीय आपातकाल” बताया।
वहीं, डेमोक्रेट शासित 12 अमेरिकी राज्यों के कारोबारियों की ओर से दायर याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि IEEPA कानून का उद्देश्य आपात परिस्थितियों से निपटना है, न कि व्यापक व्यापार नीति लागू करना। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि टैरिफ तय करने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
इससे पहले निचली फेडरल अदालतें ट्रंप सरकार के कई टैरिफ को अवैध ठहरा चुकी हैं, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। नवंबर 2025 में हुई मौखिक सुनवाई के दौरान यह संकेत भी मिले थे कि रूढ़िवादी और उदारवादी, दोनों तरह के जज राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों की इस व्याख्या को लेकर संशय में हैं।
अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाता, तो अमेरिकी सरकार को करीब 130 से 150 अरब डॉलर तक की वसूली गई ड्यूटी लौटानी पड़ सकती थी। खुद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि अगर सरकार यह केस हारती है, तो यह अमेरिका के लिए एक “आर्थिक आपदा” साबित हो सकती है।