तालिबान का पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार: अफगानिस्तान में पाकिस्तानी दवाओं की बिक्री पर लगाई पूर्ण रोक

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 06:21 PM

no pakistani medicines to be sold in afghanistan after feb 9

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से आयातित दवाओं की बिक्री पर 9 फरवरी के बाद पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों, बंद व्यापार मार्गों और सीमा तनाव के बीच लिया गया है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ने की आशंका है।

International Desk: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच काबुल सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि 9 फरवरी के बाद पाकिस्तान से आयातित दवाओं की अफगानिस्तान में बिक्री नहीं होगी। अफगान वित्त मंत्रालय ने व्यापारियों को चेतावनी दी है कि वे तय समय-सीमा के भीतर सभी लेन-देन पूरे कर लें। अफगान समाचार एजेंसी पाजहवोक के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने कहा है कि अब केवल 19 दिन शेष हैं, जिसके बाद पाकिस्तान से आई किसी भी दवा को सीमा शुल्क के जरिए मंजूरी नहीं दी जाएगी।

 

गौरतलब है कि 13 नवंबर 2025 को ही यह निर्णय लिया गया था कि तीन महीने के भीतर पाकिस्तान से आने वाली दवाओं की कस्टम प्रोसेसिंग पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यह आदेश उप प्रधानमंत्री (आर्थिक मामलों) के कार्यालय के निर्देश पर जारी किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल के अंत से अफगानिस्तान-पाकिस्तान के व्यापारिक रास्ते बंद हैं, जिसके चलते दोनों देशों के बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव और दवाओं सहित जरूरी वस्तुओं की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी जा रही है।

 

11 अक्टूबर को सीमा पर हुई भीषण गोलीबारी के बाद दोनों देशों के बीच अस्थायी संघर्षविराम तो हुआ, लेकिन व्यापार और सीमा प्रबंधन को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी। 2,600 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा, जो ब्रिटिश शासन के दौरान खींची गई थी, लंबे समय से विवाद का कारण बनी हुई है और इसी क्षेत्र में कई बार झड़पें हो चुकी हैं। अफगानिस्तान, जो एक स्थल-रुद्ध देश है, व्यापार के लिए काफी हद तक पाकिस्तान के कराची और ग्वादर बंदरगाहों पर निर्भर रहा है। इसके अलावा ईरान के रास्ते भी व्यापार किया जाता है।

 

करीब तीन महीने पहले तालिबान बलों ने सीमा पर सैन्य कार्रवाई की थी, जिसे काबुल ने पाकिस्तानी हवाई हमलों का जवाब बताया था। कतर, सऊदी अरब और तुर्किये में हुई कई दौर की बातचीत भी विफल रही। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया कि तुर्किये में वार्ता की विफलता के लिए पाकिस्तान का गैर-जिम्मेदार रवैया जिम्मेदार था। इससे पहले, 12 नवंबर को उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने अफगान व्यापारियों से पाकिस्तान पर निर्भरता खत्म करने और वैकल्पिक व्यापार मार्ग अपनाने की अपील की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान बार-बार व्यापार मार्ग बंद कर कारोबार को राजनीति का शिकार बनाता रहा है, जिससे अफगान व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ।

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