Edited By Sahil Kumar,Updated: 27 Feb, 2026 07:52 PM

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के खिलाफ सीमा पर सख्त कार्रवाई की, जिसमें 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई पोस्टों पर कब्जा किया गया। इस ऑपरेशन के पीछे तालिबान के वरिष्ठ नेता और अफगान सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ मोहम्मद फसीहुद्दीन फितरत हैं। फितरत...
नेशनल डेस्कः अफगानिस्तान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ मोहम्मद फसीहुद्दीन फितरत ने हाल के दिनों में पाकिस्तान के खिलाफ अफगान सेना की कार्रवाई के जरिए अपनी रणनीतिक क्षमता का लोहा मनवाया है। शुक्रवार सुबह अफगान सैनिकों ने काबुल और उत्तरी प्रांतों में पाकिस्तान के हमलों का करारा जवाब दिया, जिसमें सीमा पर 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इसके साथ ही अफगान सेना ने पाकिस्तान के कुछ शहरों और सीमा के पास स्थित 19 पोस्टों पर कब्जा कर बड़ा संदेश दिया। इन अभियानों के पीछे अफगान सैन्य रणनीति के प्रमुख चेहरा के रूप में फितरत का नाम सामने आ रहा है।
तालिबान का वरिष्ठ ताजिक कमांडर
फसीहुद्दीन फितरत अफगानिस्तान में तालिबान के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और 2021 से अफगान सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ हैं। वे ताजिक समुदाय से हैं, जो उत्तरी अफगानिस्तान में बड़ा अल्पसंख्यक समूह है। तालिबान के भीतर उन्हें सख्त, रणनीतिक और निर्णायक कमांडर के रूप में जाना जाता है। उत्तर अफगान प्रांतों में उनकी सैन्य कार्रवाइयों ने संगठन की पकड़ को और मजबूत किया है।
बदख्शां से तालिबान के मुख्य सैन्य नेता
फितरत का जन्म बदख्शां प्रांत के वारदुज ज़िले के इस्तिराब कस्बे में हुआ। वे दरी भाषा बोलने वाले ताजिक परिवार से हैं। उनके पिता मौलवी सैफुद्दीन एक धार्मिक विद्वान और स्थानीय इमाम थे। बचपन से ही धार्मिक माहौल में पले-बढ़े फितरत ने 1990 के दशक में यमगान ज़िले के एक मदरसे में शिक्षा पूरी की और बाद में शिक्षक के रूप में काम किया। कराची में इस्लामी अध्ययन के दौरान उनका झुकाव तालिबान आंदोलन की ओर बढ़ गया।
1996 में तालिबान का काबुल पर कब्जा
1990 के दशक के अंत में फितरत तालिबान में शामिल हुए। 1996 में तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया और अफगानिस्तान में अपनी इस्लामी अमीरात की स्थापना की। फितरत ने उत्तरी इलाकों में नॉर्दर्न अलायंस के गढ़ों को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2001 में अमेरिका के नेतृत्व वाले हमले के बाद तालिबान की सरकार गिर गई, लेकिन फितरत बदख्शां के ‘शैडो गवर्नर’ और सैन्य आयोग के प्रमुख बने।
पंजशीर विजय और "उत्तर का विजेता"
2021 में जब तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जा किया, तब फितरत ने उत्तरी ताजिक-बहुल इलाकों में अभियान चलाया। उन्होंने पंजशीर प्रांत में नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व किया और प्रांत को तालिबान के नियंत्रण में लाया। इस सफलता के बाद उन्हें तालिबान के बीच "फतह-ए-शुमाल" यानी “उत्तर का विजेता” कहा जाने लगा।
बाल्खाब विद्रोह
2022 में सर-ए-पुल प्रांत के बाल्खाब इलाके में हजारा नेता महदी मुजाहिद के विद्रोह को दबाने में फितरत ने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने ISIS-खुरासान के खिलाफ कई अभियानों का नेतृत्व कर तालिबान सरकार के लिए आतंकी खतरों को नियंत्रित किया। चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के रूप में वे अफगान सशस्त्र बलों की रणनीति और संचालन के सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।