Edited By Pardeep,Updated: 19 Jun, 2026 12:50 AM

अमेरिका और ईरान के बीच 110 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद आखिरकार शांति की उम्मीद जगी है, लेकिन इस समझौते (The Burstock Accord) ने राहत के साथ-साथ कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोइजतबा खामनेई ने अपनी...
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका और ईरान के बीच 110 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद आखिरकार शांति की उम्मीद जगी है, लेकिन इस समझौते (The Burstock Accord) ने राहत के साथ-साथ कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है।
खामनेई की दो टूक: शर्तों के पालन पर टिकी है नजर
ईरान के सर्वोच्च नेता ने साफ कर दिया है कि यदि अमेरिकी पक्ष समझौते की आड़ में किसी भी तरह की अनुचित या अत्यधिक मांगें रखता है, तो ईरान उन्हें कतई स्वीकार नहीं करेगा। खामनेई ने कहा कि वह अब समझौते की शर्तों को जमीन पर लागू होते देखना चाहते हैं। उन्होंने खुलासा किया कि व्यक्तिगत रूप से उनकी राय इस मुद्दे पर अलग थी, लेकिन देश के राष्ट्रपति और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’ और ईरानी हितों की रक्षा का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने इसे मंजूरी दी है।
डोनाल्ड ट्रंप का दावा: टल गया बड़ा युद्ध
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को अपनी एक बड़ी कूटनीतिक जीत करार दिया है। ट्रंप का कहना है कि इस डील की बदौलत मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध का खतरा टल गया है और तेल की सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल गया है। अमेरिका ने यह भी दावा किया है कि इस समझौते से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया गया है।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के बदले सुर
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका अब कुछ शर्तों के साथ ईरान के नागरिक परमाणु कार्यक्रम को स्वीकार करने के संकेत दे रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने माना कि बिजली उत्पादन के लिए परमाणु ऊर्जा की जरूरत हो सकती है, हालांकि उन्होंने ईरान के विशाल तेल भंडार पर सवाल उठाते हुए इसकी आवश्यकता पर संदेह भी जताया।
स्विट्जरलैंड में होगी अगली बैठक, इजरायल की गैर-मौजूदगी पर सवाल
इस समझौते को पूरी तरह लागू करने के लिए अब दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक (Bürgenstock) में मुलाकात करेंगे। स्विस विदेश मंत्रालय ने इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया से इजरायल की दूरी ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है, क्योंकि पूरे संघर्ष के दौरान इजरायल की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही थी।