Edited By Tanuja,Updated: 22 Jan, 2026 03:33 PM

दावोस में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के वर्चस्व को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था टूट चुकी है और दुनिया नई शक्तियों—भारत और चीन की ओर बढ़ रही है। यह भाषण ट्रंप के लिए सीधा राजनीतिक संदेश माना जा रहा...
International Desk: दावोस में इस बार जो माहौल दिखा, वह अभूतपूर्व था। विश्व आर्थिक मंच के मंच से कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका की दशकों पुरानी वैश्विक दादागीरी पर सीधा प्रहार किया। डोनाल्ड ट्रंप के दावोस पहुंचने से ठीक पहले दिया गया यह भाषण अब तक का उनका सबसे साहसिक और तीखा बयान माना जा रहा है। कार्नी ने साफ शब्दों में कहा कि जिस “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया को दिशा दी, वह अब टूट चुकी है। अब नियम नहीं, बल्कि ताकत की राजनीति चल रही है। उन्होंने चेताया कि बीते दौर की यादों में जीना अब कोई रणनीति नहीं रह गई है।
पावर शिफ्ट: भारत का उदय
कार्नी ने अपनी स्पीच में भारत और चीन का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूरोप अब अपने आर्थिक और रणनीतिक भविष्य के लिए इन देशों की ओर देख रहा है। यूरोपीय संघ और भारत के बीच संभावित ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ इसी बदले हुए वैश्विक संतुलन का संकेत है।
‘टेबल पर नहीं बैठे तो परोसे जाओगे’
कार्नी ने दो टूक कहा कि दुनिया अब अमेरिका के इशारों पर नहीं चलेगी। उन्होंने ट्रंप की उस टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कनाडा को अमेरिका का ‘51वां राज्य’ कहा गया था। कार्नी बोले-“कनाडा किसी की जागीर नहीं है। हमारी संप्रभुता पर कोई सौदा नहीं होगा।” भाषण का सबसे चर्चित वाक्य यही रहा। कार्नी ने कहा कि मध्यम ताकत वाले देशों के लिए अब नया नियम है “अगर आप फैसले की मेज पर नहीं बैठे, तो आप मेनू में शामिल कर लिए जाएंगे।” उन्होंने छोटे और मध्यम देशों से एकजुट होने की अपील की।
ग्रीनलैंड पर खुला समर्थन
डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर दावों को लेकर कार्नी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कनाडा, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है और ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने का अधिकार केवल वहां के नागरिकों को है।