Edited By Pardeep,Updated: 23 Jan, 2026 05:59 AM
अमेरिका ने गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आधिकारिक रूप से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पिछले एक साल से लगातार चेतावनी दी जा रही थी कि अमेरिका का WHO से अलग होना न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया की...
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका ने गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आधिकारिक रूप से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पिछले एक साल से लगातार चेतावनी दी जा रही थी कि अमेरिका का WHO से अलग होना न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। अमेरिका का कहना है कि यह निर्णय WHO द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए कुप्रबंधन और गलत फैसलों के कारण लिया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 2025 के कार्यकाल के पहले ही दिन एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर कर WHO से बाहर निकलने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी थी। अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
WHO के साथ सिर्फ सीमित संपर्क रखेगा अमेरिका
अमेरिकी स्वास्थ्य और विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, अमेरिका अब WHO के साथ सिर्फ सीमित स्तर पर संपर्क रखेगा, ताकि औपचारिक रूप से बाहर निकलने की प्रक्रिया पूरी की जा सके। एक वरिष्ठ अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारी ने साफ कहा,
“हम न तो पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में शामिल होंगे और न ही दोबारा WHO में लौटने की कोई योजना है।”
अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अब बीमारियों की निगरानी, महामारी की रोकथाम और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर WHO के बजाय सीधे दूसरे देशों के साथ काम करेगा।
बकाया शुल्क को लेकर विवाद
अमेरिकी कानून के मुताबिक, किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था से बाहर निकलने से पहले एक साल का नोटिस देना और सभी बकाया शुल्क चुकाना जरूरी होता है। WHO का कहना है कि अमेरिका पर करीब 260 मिलियन डॉलर (लगभग 2,100 करोड़ रुपये) का बकाया है, जिसमें 2024 और 2025 की फीस भी शामिल है।
हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि कानून में यह साफ नहीं लिखा है कि भुगतान किए बिना बाहर नहीं निकला जा सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा,“अमेरिकी जनता पहले ही बहुत ज्यादा भुगतान कर चुकी है।” स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) ने यह भी पुष्टि की कि अमेरिका ने WHO को दी जाने वाली फंडिंग पूरी तरह बंद कर दी है। विभाग के मुताबिक, ट्रंप ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि WHO की नीतियों की वजह से अमेरिका को ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
WHO मुख्यालय से हटाया गया अमेरिकी झंडा
गवाहों के अनुसार, गुरुवार को स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा हटा दिया गया। यह कदम अमेरिका के औपचारिक रूप से संगठन से बाहर निकलने का प्रतीक माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र से दूरी बढ़ा रहा अमेरिका
हाल के हफ्तों में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी कई अन्य संस्थाओं से भी दूरी बनानी शुरू कर दी है। कुछ विशेषज्ञों को डर है कि ट्रंप द्वारा शुरू किया गया नया “Board of Peace” संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है।
कुछ WHO आलोचकों ने संगठन के विकल्प के तौर पर एक नई वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी बनाने का सुझाव भी दिया है। हालांकि ट्रंप प्रशासन द्वारा पिछले साल देखे गए एक प्रस्ताव में WHO में सुधार और अमेरिकी नेतृत्व को मजबूत करने की बात कही गई थी, न कि पूरी तरह नई संस्था बनाने की।
जल्द वापसी की संभावना बेहद कम
पिछले एक साल में कई वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और खुद WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने अमेरिका से फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की थी। लेकिन अब अमेरिका के रुख से साफ है कि निकट भविष्य में वापसी की संभावना नहीं है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के वैश्विक स्वास्थ्य कानून विशेषज्ञ लॉरेंस गोस्टिन ने कहा, “यह अमेरिकी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है, लेकिन ट्रंप शायद इससे बच निकलेंगे।”
बिल गेट्स, जो वैश्विक स्वास्थ्य पहलों के बड़े समर्थक हैं और WHO को फंड देने वालों में शामिल हैं, ने दावोस में कहा कि उन्हें जल्द अमेरिका की वापसी की उम्मीद नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा, “दुनिया को WHO की जरूरत है।”
WHO पर पड़ेगा भारी असर
अमेरिका के बाहर निकलने से WHO को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। अमेरिका अब तक WHO का सबसे बड़ा वित्तीय समर्थक था और कुल फंडिंग का करीब 18% देता था। फंडिंग रुकने के बाद WHO ने अपने शीर्ष प्रबंधन को आधा कर दिया है और कई कार्यक्रमों के बजट में कटौती की गई है।
WHO ने यह भी बताया कि उसे इस साल के मध्य तक अपने करीब 25% कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ेगी। हालांकि पिछले एक साल में WHO और अमेरिका के बीच जानकारी साझा होती रही है, लेकिन आगे यह सहयोग कैसे चलेगा, यह अभी साफ नहीं है।
दुनिया के लिए बढ़ा खतरा
वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का WHO से बाहर निकलना पूरी दुनिया के लिए खतरा पैदा कर सकता है। ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज़ की केली हेनिंग ने कहा, “अमेरिका के बाहर जाने से बीमारी की पहचान, रोकथाम और महामारी से निपटने की वैश्विक व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।” यह फैसला न सिर्फ WHO बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।