Edited By Tanuja,Updated: 18 Aug, 2026 11:20 AM

अमेरिकी वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने सीजफायर अवधि का इस्तेमाल सैन्य क्षमता बढ़ाने में किया। IRGC ने मिसाइल उत्पादन और सटीकता बढ़ाई तथा क्षेत्रीय सहयोगी समूहों से संपर्क मजबूत किया। रिपोर्ट में प्री-एम्प्टिव हमलों और कुवैत में...
Tehran:अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच एक रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की चिंता बढ़ा दी है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने सीजफायर के दौरान अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने मिसाइल उत्पादन तेज किया, उनकी सटीकता बढ़ाई और क्षेत्र में अपने सहयोगी सशस्त्र समूहों के साथ संभावित बड़े संघर्ष की तैयारी की।रिपोर्ट के अनुसार, जून में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद अमेरिका को उम्मीद थी कि तनाव कम होगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही सामान्य करने की दिशा में कदम उठेंगे। लेकिन ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व ने इस अवधि को अलग नजरिए से देखा।
ईरान के IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने जुलाई में कहा था कि ईरान ने सीजफायर की अवधि का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने बताया कि ईरान ने अपनी क्षमताओं को मजबूत किया, मिसाइल उत्पादन की गति बढ़ाई और मिसाइलों की सटीकता में सुधार किया। यह बयान ईरान की सरकारी-संबद्ध Tasnim एजेंसी ने भी प्रकाशित किया था।वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान ईरान के शक्तिशाली IRGC को नियमित सेना पर और अधिक नियंत्रण दिया गया। ईरान-इराक युद्ध और पिछले आंतरिक दमन अभियानों में अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर लाया गया। साथ ही घरेलू काउंटर-इंटेलिजेंस गतिविधियों को बढ़ाया गया और मिसाइल तथा ड्रोन के उत्पादन में तेजी लाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व अब संभावित लंबे संघर्ष के लिए सैन्य और सुरक्षा तंत्र को तैयार कर रहा है।
अब कुवैत निशाने पर
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि IRGC ने क्षेत्र में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के साथ भी समन्वय बढ़ाया। ईरानी कमांडरों को इराक, यमन और लेबनान भेजे जाने की बात कही गई है, जहां संभावित सैन्य अभियानों की रणनीति पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार, लाल सागर क्षेत्र में मिसाइलों, नौसैनिक हथियारों और ड्रोन लॉन्चरों की तैनाती तथा क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के साथ खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी काम हुआ।सबसे गंभीर दावा कुवैत को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सुरक्षा तंत्र ने संभावित सैन्य विस्तार के कई विकल्पों पर विचार किया है। इनमें प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक, फारस की खाड़ी में समुद्र के नीचे मौजूद इंटरनेट केबलों को नुकसान पहुंचाना, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश और कुवैत में संभावित जमीनी अभियान तक शामिल बताए गए हैं।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुवैत ने इस खतरे को गंभीरता से लिया है। मई की शुरुआत में कुवैत ने दावा किया था कि उसकी सुरक्षा एजेंसियों ने छह IRGC कर्मियों को पकड़ा, जिन्होंने किराए की मछली पकड़ने वाली नाव के जरिए एक कुवैती द्वीप पर पहुंचने की कोशिश की थी।
खार्ग द्वीप पर हमला हुआ तो...
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ईरानी राजनीतिक हस्तियों ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका ईरान के रणनीतिक ठिकानों, जैसे खार्ग द्वीप, को निशाना बनाता है तो IRGC दक्षिणी इराक के रास्ते जमीनी कार्रवाई करने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। इसका मतलब यह है कि भविष्य का संघर्ष केवल ईरान-अमेरिका या ईरान-इजरायल तक सीमित रहने के बजाय खाड़ी के दूसरे देशों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
इसी बीच ईरान की सुरक्षा और सैन्य व्यवस्था में भी बदलाव किए जाने की बात सामने आई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अनुभवी सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। IRGC के नए कमांडर-इन-चीफ अहमद वहीदी को दुश्मन के खिलाफ आक्रामक अभियानों की तैयारी का जिम्मा सौंपे जाने की रिपोर्ट है। उनके सलाहकार जनरल मोहम्मद रजा नगदी ने भी कहा कि IRGC को दुश्मन के क्षेत्र में अभियान चलाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
समझौते पर फिर उठे सवाल
ईरान की ओर से सीजफायर के दौरान सैन्य क्षमता बढ़ाने की बात सामने आने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच किसी स्थायी समझौते की उम्मीदों को झटका लग सकता है। ईरान की अपनी आधिकारिक बयानबाजी में भी सीजफायर को सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के अवसर के रूप में पेश किया गया है। जुलाई में IRGC प्रवक्ता ने कहा था कि ईरान ने सीजफायर के दौरान अपनी रक्षा क्षमता, मिसाइल उत्पादन और मिसाइलों की सटीकता में सुधार किया। अगर वॉल स्ट्रीट जर्नल में सामने आए दावे सही साबित होते हैं, तो आने वाले समय में पश्चिम एशिया का संघर्ष एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में प्रवेश कर सकता है। मिसाइल और ड्रोन उत्पादन, क्षेत्रीय सहयोगी समूहों की सक्रियता और संभावित प्री-एम्प्टिव हमलों की रणनीति से अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के लिए सुरक्षा चुनौती बढ़ सकती है।