Edited By Pardeep,Updated: 12 Mar, 2026 06:11 AM

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार ने विदेशी देशों की मैन्युफैक्चरिंग और व्यापारिक नीतियों की नई जांच शुरू की है। इस जांच के दायरे में भारत समेत कुल 16 अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार ने विदेशी देशों की मैन्युफैक्चरिंग और व्यापारिक नीतियों की नई जांच शुरू की है। इस जांच के दायरे में भारत समेत कुल 16 अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब US सुप्रीम कोर्ट ने पहले लगाए गए कुछ टैरिफ को आर्थिक आपातकाल बताकर खारिज कर दिया था। इसके बाद अब ट्रंप प्रशासन ने एक नया रास्ता अपनाते हुए विदेशी देशों की उत्पादन क्षमता और व्यापार नीतियों की जांच शुरू करने का फैसला किया है।
ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत होगी जांच
अमेरिका के ट्रेड प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने आधिकारिक घोषणा में बताया कि यह जांच Section 301 of the Trade Act of 1974 के तहत शुरू की जा रही है। इस कानून के तहत अगर अमेरिका को लगे कि किसी देश की व्यापारिक नीतियां अनुचित हैं या अमेरिकी उद्योग को नुकसान पहुंचा रही हैं, तो अमेरिका उस देश के उत्पादों पर नए आयात कर (Import Tariffs) लगा सकता है।
भारत समेत 16 देश जांच के दायरे में
इस जांच में अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदार शामिल हैं। इनमें प्रमुख देश चीन, यूरोपियन यूनियन, मेक्सिको, भारत, जापान, साउथ कोरिया और ताइवान हैं। इसके अलावा जिन देशों को जांच में शामिल किया गया है, उनमें स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देश भी शामिल हैं।
अमेरिका ने क्या कहा
अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि कई देशों ने ऐसी उत्पादन क्षमता विकसित कर ली है जो घरेलू और वैश्विक मांग से कहीं ज्यादा है। उनके मुताबिक कई देश जरूरत से ज्यादा उत्पादन करके अपने उत्पाद अमेरिका में बेच रहे हैं। इससे अमेरिकी कंपनियों की घरेलू उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है और निवेश व विस्तार पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब अपने औद्योगिक आधार को दूसरे देशों के कारण कमजोर नहीं होने देगा।
अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की कोशिश
ग्रीर ने आधिकारिक बयान में कहा कि ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को अमेरिका में वापस लाना (Reshoring) और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अच्छी सैलरी वाली नौकरियां पैदा करना है। उनका कहना है कि कई सेक्टर में अमेरिका की घरेलू उत्पादन क्षमता कम हो गई है या विदेशी प्रतिस्पर्धियों से पीछे छूट गई है, इसलिए इस जांच के जरिए स्थिति का आकलन किया जाएगा।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंध
हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा हुई थी। इस समझौते के तहत ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था। व्हाइट हाउस के अनुसार यह फैसला तब लिया गया जब भारत ने आश्वासन दिया कि वह रूसी तेल की खरीद कम करने और रोकने पर विचार करेगा।
रूस से तेल खरीद को लेकर भी लगा था टैरिफ
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने अपने तथाकथित ‘Liberation Day’ अभियान के दौरान भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इसके बाद अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ भी लगाया था और कहा था कि यह रूस से तेल खरीदने और यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देने के कारण लगाया गया है।
दोनों देशों ने बताया ऐतिहासिक समझौता
हालांकि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन दोनों देशों ने इसे ‘ऐतिहासिक’ समझौता बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई जांच के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध आगे भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे और आने वाले समय में इस मुद्दे पर और बातचीत हो सकती है।