Edited By Pardeep,Updated: 11 May, 2026 02:46 AM

पश्चिमी एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने तेहरान से मिले जवाब पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे "पूरी तरह से अस्वीकार्य" करार...
वॉशिंगटन: पश्चिमी एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने तेहरान से मिले जवाब पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे "पूरी तरह से अस्वीकार्य" करार दिया है।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का तीखा हमला
ईरान के 'प्रतिनिधियों' से मिले जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "मैंने अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा है। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया—यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है!"। गौरतलब है कि ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका के उस प्रस्ताव पर अपना जवाब भेजा था, जिसमें क्षेत्रीय संघर्ष को कम करने की बात कही गई थी।
ईरान ने रखीं कड़ी शर्तें
ईरानी मीडिया और रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के मसौदे में वाशिंगटन के सामने कई बड़ी मांगें रखी गई थीं। ईरान ने मांग की है कि अमेरिका उस पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए और ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी खत्म करे। इसके अलावा, ईरान ने अमेरिकी सेना को क्षेत्र से पूरी तरह वापस बुलाने, सभी शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयां बंद करने और लेबनान में इजरायल के युद्ध को समाप्त करने की शर्त भी रखी है।
"ईरान सैन्य रूप से हार चुका है"
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि वह पहले ही सैन्य रूप से हार चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब न तो कोई नौसेना बची है, न वायुसेना और न ही विमान भेदी हथियार। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने अपने संभावित लक्ष्यों में से लगभग 70 प्रतिशत को नष्ट कर दिया है और यदि अमेरिका आज पीछे हट जाए, तो ईरान को दोबारा खड़ा होने में 20 साल लग जाएंगे।
परमाणु हथियारों पर कड़ी चेतावनी
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के "पागल" शासन को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दे सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार पर कड़ी नजर रख रहा है और यदि ईरान ने इन साइटों तक पहुंचने की कोशिश की, तो तत्काल सैन्य कार्रवाई की जाएगी।