Edited By Tanuja,Updated: 08 Apr, 2026 02:19 PM

अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते का अस्थायी युद्धविराम हुआ है। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इसे राहत भरा कदम बताया। होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और स्थायी शांति के लिए बातचीत जारी है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील...
International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब एक बड़ी राहत सामने आई है। दोनों देशों ने दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति जताई है, जिससे पूरी दुनिया में राहत की लहर दौड़ गई है।
ब्रिटेन औरोर यूप की प्रतिक्रिया
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह “दुनिया और क्षेत्र के लिए राहत का पल” है। उन्होंने जोर दिया कि इस युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलना बेहद जरूरी है। वहीं यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष Kaja Kallas ने इसे “खतरनाक स्थिति से एक कदम पीछे हटना” बताया। उन्होंने कहा कि इससे मिसाइल हमले रुकेंगे, व्यापार फिर शुरू होगा और कूटनीति के लिए रास्ता खुलेगा।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
Strait of Hormuz दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। युद्ध के कारण यह मार्ग प्रभावित था। अब इसे दोबारा खोलने पर जोर दिया जा रहा है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है
ट्रंप का बड़ा फैसला
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने “हमले और बमबारी रोकने” का फैसला लेते हुए दो हफ्ते का विराम घोषित किया। उन्होंने कहा कि ईरान की 10-पॉइंट योजना बातचीत के लिए “काम करने योग्य” है । यह विराम अंतिम समझौते का रास्ता खोल सकता है। शर्त यही है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना होगा।
ईरान का रुख
ईरान ने संकेत दिया है कि अगर उस पर हमले बंद होते हैं तो वह भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा। ईरान ने सुरक्षित समुद्री रास्ते देने की बात कही साथ ही होर्मुज पर अपने नियंत्रण की बात दोहराई।
संयुक्त राष्ट्र की अपील
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख Antonio Guterres ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा “मानव जीवन बचाने के लिए लड़ाई तुरंत रुकनी चाहिए”। सभी पक्ष अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करें और स्थायी शांति के लिए बातचीत जारी रखी जाए।
अभी भी खतरा क्यों बना हुआ है?
- युद्धविराम सिर्फ 2 हफ्तों के लिए अस्थायी है
- कई मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं
- अगर बातचीत विफल हुई तो संघर्ष फिर भड़क सकता है