Edited By Anu Malhotra,Updated: 31 Mar, 2026 06:05 PM

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और इज़राइल के बीच जारी खूनी संघर्ष ने पूरी दुनिया को एक ऐसी कगार पर खड़ा कर दिया है, जहाँ अब शांति की बातें कम और परमाणु हथियारों की चर्चा ज़्यादा हो रही है। पिछले एक साल में ईरान पर हुए दो बड़े हमलों ने मिडिल ईस्ट की आग को...
इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और इज़राइल के बीच जारी खूनी संघर्ष ने पूरी दुनिया को एक ऐसी कगार पर खड़ा कर दिया है, जहां अब शांति की बातें कम और परमाणु हथियारों की चर्चा ज़्यादा हो रही है। पिछले एक साल में ईरान पर हुए दो बड़े हमलों ने मिडिल ईस्ट की आग को पूरी दुनिया में फैला दिया है। 5 हफ़्तों से जारी इस सैन्य कार्रवाई का मकसद भले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना और वहाँ सत्ता परिवर्तन करना था, लेकिन इसके नतीजे बिल्कुल उलट दिख रहे हैं। इस युद्ध ने दुनिया भर के उन देशों को डरा दिया है जिनके पास अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु ढाल नहीं है।
अब हालात यह हैं कि यूरोप से लेकर पूर्वी एशिया तक, कई देश अपनी पुरानी नीतियों को कूड़ेदान में डाल रहे हैं। डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की बदलती और अनिश्चित नीतियों ने उसके सहयोगियों के मन में यह डर पैदा कर दिया है कि मुश्किल वक्त में अमेरिका उनका साथ छोड़ सकता है। यही वजह है कि कल तक अमेरिका के भरोसे रहने वाले जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और पोलैंड जैसे देश अब खुद का परमाणु बम बनाने की सोच रहे हैं।
यूरोप में हलचल तेज़ है। जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ के बाद सत्ता संभालने वाले फ्रेडरिक मर्ज़ अब फ्रांस के साथ मिलकर परमाणु सुरक्षा पर गुप्त चर्चाएँ कर रहे हैं। पोलैंड भी अब अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों का मुंह नहीं ताकना चाहता। वहीं एशिया में, जापान जैसा देश जो परमाणु हमले का दर्द झेल चुका है, वह भी अब चीन, रूस और उत्तर कोरिया के खतरे को देखते हुए परमाणु हथियार रखने की वकालत कर रहा है। दक्षिण कोरिया की तो 75 फीसदी जनता मानती है कि उनके पास अपना खुद का 'एटम बम' होना चाहिए।
मिडिल ईस्ट में भी समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं। सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान परमाणु ताकत बनता है, तो वह भी पीछे नहीं रहेगा। हाल ही में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते ने इस डर को और बढ़ा दिया है, जिसमें पाकिस्तान ने ज़रूरत पड़ने पर अपने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात कही है। तुर्की भी अब इस दौड़ में शामिल होने के संकेत दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन और लीबिया जैसे देशों का हश्र देखने के बाद दुनिया को समझ आ गया है कि बिना परमाणु हथियार के किसी भी देश की संप्रभुता सुरक्षित नहीं है। जहां परमाणु संपन्न उत्तर कोरिया पर कोई हाथ डालने से डरता है, वहीं बिना परमाणु ढाल वाले देशों को आसानी से निशाना बनाया जा रहा है। आज दुनिया में नौ देशों के पास करीब 12,000 से ज़्यादा परमाणु वारहेड हैं, जो पूरी पृथ्वी को कई बार तबाह करने के लिए काफी हैं।
डूम्सडे क्लॉक (विनाश की घड़ी) अब आधी रात से महज़ 85 सेकंड दूर है, जो इस बात का संकेत है कि मानवता अपने सबसे बुरे दौर के करीब है। ईरान अब परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने की धमकी दे रहा है, जिससे दुनिया भर में परमाणु हथियारों को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। कुल मिलाकर, ईरान की जंग ने एक ऐसे 'जिन्न' को बोतल से बाहर निकाल दिया है, जिसे वापस अंदर करना अब नामुमकिन लग रहा है।