Edited By Parveen Kumar,Updated: 10 Apr, 2026 10:24 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा संदेश देते हुए संकेत दिया है कि अगर शांति वार्ता में सहयोग नहीं मिला, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई का रास्ता भी अपना सकता है। उनके इस बयान से क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर बढ़ने के आसार दिख रहे हैं।
नेशनल डेस्क : शनिवार को इस्लामाबाद में होने जा रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से ठीक पहले माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। कूटनीतिक बातचीत से पहले दोनों पक्षों की सख्त बयानबाज़ी ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
ट्रंप की बड़ी चेतावनी, सैन्य कार्रवाई के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में कहा कि अमेरिका अपने “सबसे खतरनाक हथियारों” को जहाजों में लोड कर रहा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर यह शांति वार्ता विफल होती है, तो अत्याधुनिक हथियारों से लैस अमेरिकी युद्धपोतों को तैनात किया जा सकता है। ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका कूटनीति के साथ-साथ सैन्य विकल्प भी खुला रखे हुए है।
वार्ता के अहम मुद्दे क्या हैं?
सूत्रों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में होने वाली इस बैठक का मकसद सीजफायर के बाद एक स्थायी समझौता सुनिश्चित करना है। बातचीत में यूरेनियम संवर्धन, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवागमन, ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिबंधों में संभावित राहत जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
ईरान की सख्त शर्तें, पहले ये कदम जरूरी
ईरान की ओर से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबाफ़ ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी दो प्रमुख शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। इन शर्तों में लेबनान में सीजफायर लागू करना और ईरान की ब्लॉक की गई संपत्तियों को रिलीज़ करना शामिल है।
जेडी वेंस का भी सख्त संदेश
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अमेरिका के साथ “खेल” न खेले। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वार्ता का उद्देश्य युद्ध को खत्म करना है, लेकिन इसके लिए ईरान का सहयोग जरूरी है।