Edited By Mehak,Updated: 28 Mar, 2026 01:52 PM

अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बताया कि अमेरिका द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव का जवाब किसी भी पल आ सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ जमीन पर सेना की जरूरत नहीं है और अमेरिकी दबाव हवाई शक्ति और तकनीक...
इंटरनेशनल डेस्क : मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सैन्य अभियान पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ी जानकारी दी है। रुबियो का कहना है कि अमेरिका का सैन्य अभियान 'महीनों नहीं, बल्कि हफ्तों' में खत्म हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए जमीनी सेना उतारने की जरूरत नहीं पड़ेगी, हालांकि कुछ सैनिक क्षेत्र में तैनात किए जा रहे हैं ताकि स्थिति बिगड़ने पर विकल्प खुले रहें।
अमेरिकी रणनीति और सैनिक तैनाती
रुबियो ने फ्रांस में G7 देशों की बैठक के बाद बताया कि अमेरिका अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पहले या नियत समय पर हासिल कर सकता है। हालांकि पेंटागन ने हजारों मरीन और एयरबोर्न सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजना शुरू कर दिया है। मार्च महीने के अंत तक पहला बैच बड़े एम्फीबियस जहाज के जरिए पहुंचने वाला है। इससे यह संकेत मिलता है कि अगर हालात बिगड़े तो संघर्ष जमीनी स्तर तक फैल सकता है।
हालात और हाल की घटनाएं
हालांकि अमेरिका जमीनी युद्ध से इनकार कर रहा है, हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। ईरान लगातार अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों पर हमले कर रहा है। हाल ही में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर है। इस हमले में कई सैन्य विमान भी नष्ट हो गए।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 10 दिन की डेडलाइन दी है। इसके अलावा, पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा गया, जिसमें यूरेनियम संवर्धन रोकने और मिसाइल कार्यक्रम सीमित करने जैसी शर्तें शामिल हैं।
अमेरिकी और ईरानी हताहत
जंग का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ईरान में अब तक 1900 से ज्यादा लोग मरे और 20,000 से अधिक घायल हुए हैं। वहीं, अमेरिका के 300 से अधिक सैनिक घायल और 13 की मौत हो चुकी है।
ईरान की मिसाइल क्षमता भी पूरी तरह नष्ट नहीं की जा सकी। ब्रिटिश समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अब तक ईरान की करीब एक-तिहाई मिसाइल क्षमता ही नष्ट हुई है, यानी उसके पास अभी भी जवाबी हमलों की बड़ी ताकत मौजूद है।