Edited By Parveen Kumar,Updated: 11 Oct, 2026 09:45 PM
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने 60 दिन के पूर्ण युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि यदि रूस दो महीने तक युद्ध रोकने पर सहमत होता है, तो यूक्रेन में चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके साथ...
इंटरनेशनल डेस्क : यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने 60 दिन के पूर्ण युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि यदि रूस दो महीने तक युद्ध रोकने पर सहमत होता है, तो यूक्रेन में चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके साथ ही जेलेंस्की ने संकेत दिया कि यदि मॉस्को यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले बंद कर देता है, तो कीव भी रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना रोक सकता है।
जेलेंस्की का यह प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूक्रेन पर युद्ध समाप्त करने और रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के बढ़ते दबाव के बीच आया है। हालांकि, यूक्रेनी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते के लिए रूस की ओर से ठोस कदम और विश्वसनीय सुरक्षा गारंटी जरूरी हैं।
60 दिन के युद्धविराम के बाद चुनाव कराने का प्रस्ताव
अमेरिकी समाचार चैनल एबीसी के कार्यक्रम ‘दिस वीक’ में बातचीत के दौरान जेलेंस्की ने पुतिन से 60 दिन के पूर्ण युद्धविराम पर सहमत होने की अपील की। उन्होंने कहा “कृपया पुतिन से कहें, हमें दो महीने दें-60 दिन का पूरा युद्धविराम-और हम चुनाव कराएंगे।”
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन में चुनाव कराने का फैसला वहां के नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का सम्मान करते हुए कहा कि देश के नेता का चुनाव करना यूक्रेनी समाज और वहां के लोगों का काम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन के नागरिक जो भी फैसला करेंगे, उसे स्वीकार किया जाएगा।
दरअसल, रूस के फरवरी 2022 में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू है। इसके तहत चुनाव कराने पर कानूनी पाबंदियां हैं। यूक्रेनी सरकार का कहना है कि युद्ध के दौरान देशभर में मतदान कराना सुरक्षा और व्यवस्थागत चुनौतियों के कारण बेहद मुश्किल है।
ट्रंप ने जेलेंस्की के नेतृत्व पर उठाए सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेन में नए राष्ट्रपति की जरूरत बताते हुए जेलेंस्की की आलोचना की थी। ट्रंप ने कहा था कि यूक्रेन को अब नया राष्ट्रपति मिलना चाहिए। उन्होंने रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों को रोकने की मांग करते हुए कहा कि जेलेंस्की को ये हमले हर हाल में बंद करने चाहिए।
ट्रंप मॉस्को और कीव के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, जेलेंस्की का रुख है कि रूस पर दबाव कम करने वाली किसी भी एकतरफा रियायत से यूक्रेन की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उनका कहना है कि युद्ध समाप्त करने के लिए रूस को भी ठोस कदम उठाने होंगे।
ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का प्रस्ताव
जेलेंस्की ने कहा है कि यदि रूस यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोक देता है, तो यूक्रेन भी रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले बंद करने को तैयार है। उनका यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब ट्रंप ने रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेन के हमलों को रोकने की मांग की है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले तत्काल रोके जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए रूस की इच्छा जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि यूरोप में युद्ध के लिए रूस जिम्मेदार है और किसी भी समझौते के साथ प्रभावी सुरक्षा गारंटी होनी चाहिए।
यूक्रेन अब तक रूसी तेल और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर मॉस्को की युद्ध संबंधी आय को कम करने की रणनीति अपनाता रहा है। कीव का मानना है कि इन ठिकानों पर हमले रोकने से रूस पर दबाव घट सकता है, जबकि यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों को रूसी हमलों से सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलेगी।
ट्रंप का ऊर्जा युद्धविराम को लेकर दावा
जेलेंस्की के प्रस्ताव के कुछ ही समय बाद ट्रंप ने दावा किया कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम के लिए सहमत हो गए हैं। उनके अनुसार, दोनों पक्ष एक-दूसरे के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकेंगे। हालांकि, इस दावे और प्रस्तावित व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को लेकर दोनों पक्षों की औपचारिक घोषणाओं तथा उसके क्रियान्वयन की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की किसी भी व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष उसका पालन करते हैं या नहीं।
रूस के साथ डीजल आपूर्ति व्यवस्था पर विवाद
रूस के साथ डीजल आपूर्ति को लेकर ट्रंप प्रशासन की कोशिशों पर भी जेलेंस्की ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि रूस के साथ इस तरह की व्यवस्था से मॉस्को को प्रोत्साहन मिल सकता है। ईंधन की बढ़ती कीमतें अमेरिकी प्रशासन के लिए भी राजनीतिक चुनौती बनी हुई हैं। अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों में वृद्धि ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए अहम मुद्दा बन सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि रूस से प्रस्तावित आपूर्ति व्यवस्था से ईंधन की कीमतों में कितनी राहत मिलेगी। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित आपूर्ति की मात्रा रूस के सामान्य निर्यात की तुलना में काफी कम हो सकती है। अमेरिकी सांसदों ने भी इस व्यवस्था की आलोचना की है और मॉस्को पर प्रतिबंधों में ढील देने के बजाय दबाव बढ़ाने की वकालत की है।
यूरोप से अतिरिक्त सैन्य मदद की मांग
अमेरिका की ओर से समझौते के लिए बढ़ते दबाव के बीच जेलेंस्की यूरोपीय सहयोगियों से यूक्रेन की सैन्य क्षमता मजबूत करने और रूस पर दबाव बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सहायता मांग रहे हैं। यूक्रेन के सामने अब दोहरी चुनौती है- एक ओर युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशना और दूसरी ओर भविष्य में रूसी हमलों को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी हासिल करना। ऐसे में 60 दिन के युद्धविराम, संभावित चुनाव और ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के प्रस्ताव पर रूस की प्रतिक्रिया आगे की दिशा तय करने में अहम होगी।