15,000 रुपए सैलरी, 30 करोड़ की संपत्ति…पूर्व क्लर्क के पास मिले 24 मकान और 40 एकड़ जमीन

Edited By Updated: 02 Aug, 2025 05:49 AM

24 houses and 40 acres of land found with former clerk

कर्नाटक ग्रामीण अवसंरचना विकास लिमिटेड (KRIDL) में काम कर चुके एक पूर्व क्लर्क कलाकप्पा निदागुंडी के पास से 30 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह खुलासा लोकायुक्त की छापेमारी में हुआ है।

नेशनल डेस्कः कर्नाटक ग्रामीण अवसंरचना विकास लिमिटेड (KRIDL) में काम कर चुके एक पूर्व क्लर्क कलाकप्पा निदागुंडी के पास से 30 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह खुलासा लोकायुक्त की छापेमारी में हुआ है।

सिर्फ 15,000 रुपए वेतन, लेकिन करोड़ों की संपत्ति

निदागुंडी कभी KRIDL में दैनिक वेतनभोगी क्लर्क के तौर पर काम करता था और उसकी मासिक सैलरी मात्र 15,000 रुपए थी। इसके बावजूद लोकायुक्त की जांच में सामने आया कि: उसके नाम, पत्नी और भाई के नाम पर 24 मकान, 4 प्लॉट, 40 एकड़ कृषि ज़मीन है। साथ ही, उसके पास से 350 ग्राम सोना, 1.5 किलो चांदी, दो कारें, और दो दोपहिया वाहन भी मिले।

फर्जी बिल घोटाले में बड़ा खुलासा

इस पूरे घोटाले में निदागुंडी के साथ पूर्व इंजीनियर जेडएम चिंचोलकर का भी नाम सामने आया है। दोनों पर आरोप है कि इन्होंने मिलकर 96 परियोजनाओं के लिए फर्जी बिल और दस्तावेज बनाए, जिनमें से कोई भी परियोजना ज़मीन पर नहीं बनी। इस तरह से 72 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई।

शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई

KRIDL में हुई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हाल ही में लोकायुक्त कार्यालय में औपचारिक शिकायत की गई थी। यह शिकायत जल निकासी और पेयजल जैसी बुनियादी योजनाओं में गड़बड़ी को लेकर की गई थी। कोर्ट से आदेश मिलने के बाद, लोकायुक्त की टीम ने कलाकप्पा निदागुंडी और इंजीनियर चिंचोलकर के ठिकानों पर छापेमारी की।

छानबीन में जुटे अधिकारी

फिलहाल लोकायुक्त यह पता लगाने में जुटे हैं कि: यह भारी संपत्ति नौकरी के दौरान घूस या भ्रष्टाचार से अर्जित की गई या नौकरी छोड़ने के बाद फर्जी बिलों के ज़रिए इकट्ठा की गई। दोनों आरोपियों को पहले ही नौकरी से निकाल दिया गया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि अभी और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

क्या है KRIDL?

कर्नाटक ग्रामीण अवसंरचना विकास लिमिटेड (KRIDL) राज्य सरकार की एक एजेंसी है, जिसका काम ग्रामीण इलाकों में सड़कों, नालियों, पानी की पाइपलाइन जैसी विकास परियोजनाओं को लागू करना होता है। इस संस्था में भ्रष्टाचार सामने आना गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इसका सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ता है।

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