जहरीली शराब पीने से 61 लोग बीमार, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री का मांग इस्तीफा

Edited By Updated: 21 Aug, 2026 09:34 PM

61 people fall ill after consuming toxic liquor

गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से अब तक 61 लोग बीमार हुए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 10 मरीजों की हालत गंभीर है। राज्य सरकार ने कहा कि इस घटना को बेहद...

नेशनल डेस्क : गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से अब तक 61 लोग बीमार हुए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 10 मरीजों की हालत गंभीर है। राज्य सरकार ने कहा कि इस घटना को बेहद गंभीरता से लेकर तुरंत कार्रवाई की गयी जबकि कांग्रेस ने इस मामले को लेकर गृह विभाग संभाल रहे उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के इस्तीफे की मांग की।

जिला प्रशासन ने बताया कि अत्यधिक जहरीले पदार्थ मेथनॉल युक्त शराब पीने वाले 25 लोगों का अब भी अस्पताल में इलाज जारी है। इस घटना के सिलसिले में वरतेज थाने में दर्ज प्राथमिकी में 21 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें से 13 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गुजरात में शराब का निर्माण, बिक्री और सेवन प्रतिबंधित है। जिला प्रशासन कार्यालय ने बताया, "कुल 61 लोग बीमार हुए हैं और 25 का अब भी इलाज जारी है। शराब पीने वाले 18 अन्य लोग अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन चिकित्सकों के परामर्श के बाद वहां से चले गए।" अस्पताल में भर्ती मरीजों में से 15 की हालत स्थिर है, जबकि 10 मरीज गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में हैं। इनमें से एक मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया है।

जिला प्रशासन ने बताया कि अब तक 10 अन्य मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। मंत्री और सरकार के प्रवक्ता जितु वाघाणी ने कहा कि राज्य सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया और पुलिस की समय पर की गई कार्रवाई से आगे होने वाले जानमाल के नुकसान को रोका जा सका। वाघाणी ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि घटना में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि दो पुलिस निरीक्षकों, चार कांस्टेबल और एक सहायक उपनिरीक्षक को निलंबित किया गया है। मंत्री ने कहा कि मामले के मुख्य साजिशकर्ता गौतम सोलंकी और रईस को भी हिरासत में लिया गया है।

वाघाणी ने बताया कि पुलिस ने शराब का सेवन करने वाले 29 लोगों का पता लगाया और उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले गई। उन्होंने कहा, ''घटना के बाद राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (एसएमसी) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मिलावटी शराब पीने वाले लोगों का पता लगाया और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने पूरी गंभीरता और तत्परता से कार्रवाई की, ताकि जानमाल के नुकसान को रोका जा सका।'' मंत्री ने कहा, ''इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। राज्य सरकार ने इस पदार्थ का सेवन करने वाले लोगों की जान बचाने को प्राथमिकता दी है और मामले की गहन जांच कर रही है।'' कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित गुजरात में शराब और मादक पदार्थ खुलेआम बेचे जा रहे हैं।

गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तथ्यान्वेषी प्रतिनिधिमंडल के साथ भावनगर पहुंचे मेवाणी ने दावा किया कि ''एक सुनियोजित साजिश के तहत गुजरात के सभी 33 जिलों और 250 तालुकों में दिन-रात अवैध पदार्थ बेचे जा रहे हैं। इनमें चरस, गांजा, अन्य मादक पदार्थ और शराब शामिल हैं। इनकी बिक्री अक्सर मंदिरों और कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक (एसपी) के कार्यालयों जैसे सरकारी दफ्तरों के आसपास भी होती है।'' उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''एक साल पहले कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अमित चावड़ा के नेतृत्व में 'जन आक्रोश रैली' आयोजित किए जाने के बाद से हम राज्यव्यापी आंदोलन चला रहे हैं। मैंने उस समय भी कहा था कि जिन भ्रष्ट अधिकारियों के कदाचार के कारण गुजरात की महिलाएं विधवा हो रही हैं, उन्हें उनके पदों से हटाया जाना चाहिए।''

मेवाणी ने संघवी की उच्च शिक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भाजपा सरकार उनका इस्तीफा सुनिश्चित करने में विफल रहती है, तो राज्य में जहरीली शराब से जुड़ी ऐसी और घटनाएं होना तय है। मेवाणी ने आरोप लगाया, ''हमेशा की तरह कार्रवाई केवल कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, उपनिरीक्षक और निरीक्षक को निलंबित करने तक सीमित रहती है, जबकि पुलिस अधीक्षक (एसपी) और पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। व्यवस्था में ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने अवैध शराब के कारोबार से करोड़ों रुपये अर्जित किए हैं।''

पुलिस के अनुसार, पीड़ितों ने भारत में निर्मित लोकप्रिय विदेशी शराब (आईएमएफएल) के ब्रांड के नाम वाली नकली बोतलों में पैक की गई जहरीली शराब का सेवन किया था। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और मद्य निषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गैर-इरादतन हत्या, मिलावट और जहर देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय अदालत ने बृहस्पतिवार को आरोपियों को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। मामले की जांच राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (एसएमसी) को सौंप दी गई है। यह गुजरात पुलिस की विशेष इकाई है, जो पूरे राज्य में अवैध शराब और जुआ गतिविधियों पर नजर रखती है। 

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