सड़क हादसों पर लगाम लगाने की तैयारी, नई कारों में ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम होगा जरूरी

Edited By Updated: 23 Oct, 2026 01:05 PM

advanced emergency braking to soon become mandatory in india

देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने और सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या में भारी कमी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक बड़ा सुरक्षा नियम लागू करने की तैयारी में है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भारत में बिकने वाली सभी नई कारों...

नई दिल्ली: देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने और सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या में भारी कमी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक बड़ा सुरक्षा नियम लागू करने की तैयारी में है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भारत में बिकने वाली सभी नई कारों में एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। इस नियम के तहत नए कार मॉडल्स के लिए अक्टूबर 2030 और मौजूदा मॉडल्स के लिए अक्टूबर 2032 की समयसीमा तय करने की योजना बनाई जा रही है। सरकार की यह पहल उस बड़े रोड-सेफ्टी अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत कारों में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम तकनीक को चरणबद्ध तरीके से जरूरी बनाया जा रहा है।

क्या है AEBS और कैसे करता है यह काम?
एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS) एक आधुनिक एक्टिव सेफ्टी फीचर है, जो गाड़ी के आगे लगे कैमरों, रडार और इलेक्ट्रॉनिक सेंसरों की मदद से सड़क पर सामने मौजूद खतरों पर नजर रखता है। यदि ड्राइविंग के दौरान सामने अचानक कोई वाहन, पैदल यात्री या रुकावट आती है और ड्राइवर समय रहते ब्रेक नहीं लगा पाता, तो यह सिस्टम तुरंत प्रतिक्रिया देता है। सबसे पहले यह ड्राइवर को ऑडियो-विजुअल चेतावनी (स्क्रीन और साउंड पर अलर्ट) देता है। अगर ड्राइवर फिर भी ध्यान नहीं देता या प्रतिक्रिया में देरी करता है, तो यह तकनीक अपने आप ब्रेक लगाकर गाड़ी की रफ्तार को धीमा कर देती है या वाहन को पूरी तरह रोक देती है।

ये हैं सुरक्षा के अन्य फीचर्स-

ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग : संभावित टक्कर से ठीक पहले अपने आप ब्रेक लगाता है।

लेन डिपार्चर वार्निंग : बिना इंडिकेटर दिए गाड़ी के अपनी लेन से भटकने पर ड्राइवर को अलर्ट करता है।

इमरजेंसी लेन कीपिंग : स्टीयरिंग में जरूरी सुधार करके गाड़ी को सुरक्षित रूप से लेन के भीतर बनाए रखता है।

ब्लाइंड स्पॉट इंफोर्मेशन : शीशे में न दिखने वाले कोनों (ब्लैंड स्पॉट्स) में मौजूद वाहनों या पैदल यात्रियों की चेतावनी देता है।

ड्राइवर ड्रोजीनेस वार्निंग : ड्राइवर को नींद या सुस्ती आने पर अलार्म बजाकर अलर्ट करता है।

मूविंग ऑफ इंफोर्मेशन : रुकी हुई गाड़ी को आगे बढ़ाते समय सामने मौजूद पैदल यात्रियों या साइकिल चालकों की पहचान कर सावधान करता है।

टैक्सियों और कमर्शियल वाहनों के लिए भी कड़े नियम
लंबी दूरी तय करने वाली टैक्सियों और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों में थकान और ध्यान भटकने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए सरकार अतिरिक्त सुरक्षा नियम लागू करने जा रही है। टैक्सियों में 'इमरजेंसी लेन कीपिंग' और 'ड्राइवर फटीग अलर्ट' को अनिवार्य करने पर विचार चल रहा है। वहीं, भारी और मध्यम कमर्शियल वाहनों के लिए समयसीमा पहले ही तय कर दी गई है। मंत्रालय के अनुसार, चुनिंदा कमर्शियल वाहनों के लिए 1 अक्टूबर 2027 से AEBS स्टैंडर्ड को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित सुरक्षा फीचर्स ड्राइविंग को सुरक्षित बनाने में बेहद मददगार हैं, लेकिन एक सुरक्षित सफर के लिए खुद ड्राइवर का सचेत और सतर्क रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।

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