Edited By Anu Malhotra,Updated: 09 Feb, 2026 03:41 PM

एआईएमआईएम (AIMIM) के नेता तौकीर निजामी ने एक जनसभा के दौरान 'जूते' का उदाहरण देते हुए मुस्लिम समुदाय को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे प्रदेश की राजनीति में तूफान आ गया है। निजामी ने किसी को 'जूते चाटने वाला' तो किसी को 'जूते खाने वाला' बताकर राजनीतिक...
नेशनल डेस्क: एआईएमआईएम (AIMIM) के नेता तौकीर निजामी ने एक जनसभा के दौरान 'जूते' का उदाहरण देते हुए मुस्लिम समुदाय को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे प्रदेश की राजनीति में तूफान आ गया है। निजामी ने किसी को 'जूते चाटने वाला' तो किसी को 'जूते खाने वाला' बताकर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम जनता को भी हैरान कर दिया है।
तीन श्रेणियों में बांटा मुस्लिम समाज
तौकीर निजामी ने मंच से कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में मुस्लिम समाज तीन हिस्सों में बंट गया है। उनके मुताबिक, जो लोग कांग्रेस का साथ देते हैं वे 'जूते चाटने' का काम करते हैं और जो भाजपा की ओर जाते हैं वे 'जूते खाने' वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि हक के लिए 'जूता मारने' वाला हौसला सिर्फ असदुद्दीन ओवैसी की मजलिस में ही मुमकिन है। इस दौरान उन्होंने ओवैसी भाइयों के पुराने '15 मिनट' वाले विवादित बयान की भी याद दिलाई।
पुरानी पार्टियों पर तीखा प्रहार
निजामी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि आजादी के बाद से मुसलमानों को सिर्फ झंडे लगवाने और दरी बिछवाने तक सीमित रखा गया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि वे शत-प्रतिशत वोट की उम्मीद तो रखते हैं, लेकिन जब हक और प्रतिनिधित्व देने की बारी आती है, तो झोली खाली रह जाती है। उनके अनुसार, 'मोहब्बत' और 'नफरत' की दुकानों के बीच मुसलमानों के स्वाभिमान का रास्ता सिर्फ मजलिस से होकर गुजरता है। उन्होंने महाराष्ट्र और बिहार की चुनावी सफलताओं का हवाला देते हुए समुदाय से सड़कों पर आने और जागने की अपील की।
सरकार की दो टूक: शांति भंग करने वालों की खैर नहीं
इस भड़काऊ बयान के सामने आते ही शिवराज सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने निजामी को चुनौती देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शांति का प्रतीक है और यहां 'जूता मारने' जैसी हिंसात्मक भाषा के लिए कोई जगह नहीं है। सारंग ने आरोप लगाया कि ओवैसी और उनके सिपहसालार हमेशा लोगों को भड़काने और नफरत फैलाने की राजनीति करते हैं। उन्होंने साफ किया कि इस तरह के आपत्तिजनक बयानों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून अपना काम करेगा।