रुस ने खेला बड़ा मास्टरस्ट्रोक- Middle East Crisis के बीच भारत को 40% सस्ती LNG का किया ऑफर

Edited By Updated: 09 Apr, 2026 02:33 PM

amidst the middle east crisis 40 cheaper lng was offered to india

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट के बीच रूस ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है। इसने वैश्विक गैस बाजार में हलचल पैदा कर दी है। रुस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों को 40% तक की भारी छूट पर लिक्विफाइड...

नेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट के बीच रूस ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है। इसने वैश्विक गैस बाजार में हलचल पैदा कर दी है। रुस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों को 40% तक की भारी छूट पर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) देने की पेशकश की है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब खाड़ी देशों में संघर्ष के कारण गैस की आपूर्ति बाधित हुई है और कीमतें आसमान छू रही हैं

ये भी पढ़ें- बंगाल में चुनावी रैली में संबोधन के दौरान पीएम मोदी बोले- TMC ने युवाओं के साथ गद्दारी की

मिडिल ईस्ट संकट और बढ़ती कीमतें

बीते कुछ महीनों में मिडिल ईस्ट के गैस प्लांट्स और रिफाइनरियों पर हुए हमलों ने सप्लाई चेन को तोड़ दिया है। Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण रूट पर बढ़ते खतरे के कारण दुनियाभर में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं। इसी संकट का फायदा उठाते हुए रूस अब खुद को एक वैकल्पिक और सस्ते ऊर्जा स्रोत के रूप में पेश कर रहा है।

PunjabKesari

क्या है रूस की रणनीति और शर्तें?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस यह सस्ती गैस उन प्रोजेक्ट्स से ऑफर कर रहा है जिन पर अमेरिका ने कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। रूसी गैस की मूल पहचान छुपाने के लिए इसे चीन या अन्य मध्यस्थ कंपनियों के जरिए बेचा जा रहा है। कागजों पर इस गैस के स्रोत को ओमान या नाइजीरिया जैसे देशों का दिखाया जा सकता है ताकि खरीदार देशों पर प्रतिबंधों का खतरा कम हो। 40% तक की छूट भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर है।

ये भी पढ़ें-  Bihar New CM: बिहार में नीतीश युग का होगा अंत! 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से देंगे इस्तीफा, CM की रेस में सामने आया ये बड़ा नाम

भारत के लिए 'धर्मसंकट'

सस्ती गैस का यह ऑफर भारत के लिए जितना आकर्षक है, उतना ही जोखिम भरा भी। भारत अब तक अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस के प्रतिबंधित गैस प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाए हुए है। अगर भारत इस डील को स्वीकार करता है, तो देश के आयात बिल में भारी कमी आएगी। इस ऑफर को स्वीकार करने पर अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों में तनाव आ सकता है और भारत पर भी प्रतिबंधों की तलवार लटक सकती है।

एशियाई बाजार पर नजर

वर्तमान में केवल चीन ही रूस से इस तरह की प्रतिबंधित गैस की खरीदारी कर रहा है। लेकिन ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे अन्य एशियाई देशों के लिए अब रूस का यह 'सस्ता फॉर्मूला' एक बड़ा विकल्प बनता जा रहा है।

 

 

 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!