Edited By Purnima Singh,Updated: 22 May, 2026 04:16 PM

दुनियाभर में बढ़ती आबादी और महंगे होते घरों ने आवास संकट को गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड सिटी रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, दुनिया की करीब 40 फीसदी आबादी ऐसे घरों में रहने को मजबूर है जो या तो बेहद महंगे हैं, पर्याप्त नहीं हैं या सुरक्षित...
नेशनल डेस्क : दुनियाभर में बढ़ती आबादी और महंगे होते घरों ने आवास संकट को गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड सिटी रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, दुनिया की करीब 40 फीसदी आबादी ऐसे घरों में रहने को मजबूर है जो या तो बेहद महंगे हैं, पर्याप्त नहीं हैं या सुरक्षित नहीं माने जाते। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2050 तक शहरों में करीब दो अरब नई आबादी जुड़ने से यह संकट और गहरा सकता है।
घर खरीदना और किराये पर लेना दोनों मुश्किल
रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप और उत्तरी अमेरिका को छोड़कर लगभग हर क्षेत्र में घरों की कीमतें लोगों की आय से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं। दुनिया भर में करीब 44 फीसदी किरायेदार परिवार अपनी आय का 30 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सिर्फ किराया चुकाने में खर्च कर रहे हैं। वहीं, दुनिया में घरों की कमी भी लगातार बढ़ रही है। साल 2010 में जहां 25.1 करोड़ घरों की कमी थी, वहीं 2023 तक यह आंकड़ा बढ़कर 28.8 करोड़ पहुंच गया।
दक्षिण एशिया में हाउसिंग सेक्टर से बड़ा आर्थिक फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में हाउसिंग सेक्टर में निवेश अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा पहुंचा सकता है। यहां आवास निर्माण पर खर्च किया गया हर एक अमेरिकी डॉलर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब पांच डॉलर तक की आय पैदा कर सकता है।
भारत में तेजी से महंगे हो रहे घर
मध्य और दक्षिण एशिया में घरों की कीमत और लोगों की आय का अनुपात 2010 में 9.7 फीसदी था, जो 2023 में बढ़कर 16.8 फीसदी हो गया। भारत में भी सस्ते घरों की उपलब्धता तेजी से कम हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के आठ बड़े शहरों में 2018 में बनने वाले घरों में 52 फीसदी हिस्सेदारी किफायती घरों की थी, जो 2025 तक घटकर सिर्फ 17 फीसदी रह गई। इसकी बड़ी वजह बिल्डरों का मध्यम और महंगे घरों के निर्माण पर ज्यादा ध्यान देना बताया गया है।
मुंबई में घरों की कीमत और आय का अनुपात 14.3 जबकि दिल्ली में 10.1 दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि आम लोगों की कमाई के मुकाबले इन शहरों में घर बेहद महंगे हो चुके हैं।
पीएम आवास योजना से बढ़ी राहत
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत सब्सिडी वाले घरों की पहुंच में बढ़ोतरी हुई है। साल 2010 में जहां सिर्फ 0.3 फीसदी परिवारों तक इसकी पहुंच थी, वहीं 2023 तक यह आंकड़ा बढ़कर 7 फीसदी हो गया। पीएमएवाई-शहरी योजना के तहत अब तक करीब 1.2 करोड़ घरों को मंजूरी दी जा चुकी है।