Edited By Sahil Kumar,Updated: 03 Jan, 2026 02:26 PM

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले जारी हैं। इस्लामिक भीड़ के हमले में झुलसे कारोबारी खोकोन दास की शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें पीटकर पेट्रोल डालकर जला दिया गया था। परिवार ने सरकार से कोई मदद न मिलने का आरोप लगाया है। बीते 15 दिनों में...
International Desk: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर बढ़ते हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। इस्लामिक भीड़ की हिंसा का शिकार हुए एक और हिंदू नागरिक खोकोन दास की शनिवार को मौत हो गई। खोकोन दास पर कुछ दिन पहले भीड़ ने हमला किया था और बेरहमी से पीटने के बाद उन्हें आग के हवाले कर दिया गया था। गंभीर रूप से झुलसे खोकोन का इलाज ढाका के एक बड़े अस्पताल में चल रहा था, जहां शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
बांग्लादेश सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं
खोकोन दास के एक रिश्तेदार ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि उनकी मौत सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर हुई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, लेकिन अभी तक परिवार को सौंपा नहीं गया है। रिश्तेदार ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश सरकार की ओर से अब तक कोई सहायता नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि हमले में शामिल तीनों आरोपी अभी फरार हैं। खोकोन दास अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं।
गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का कारोबार
खोकोन दास ढाका से करीब 150 किलोमीटर दूर अपने गांव में दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का कारोबार करते थे। बताया गया कि बुधवार को दुकान बंद कर घर लौटते समय उन पर हमला किया गया। हमलावरों ने पहले उनके साथ मारपीट की और फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग से बचने के लिए खोकोन किसी तरह पास के एक तालाब में कूद गए, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुके थे। उनके शरीर पर कई गहरे जख्म भी थे।
इलाज के दौरान हुई मौत
स्थानीय लोगों ने उन्हें पहले नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां से डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए ढाका के एक बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया। कई दिनों तक इलाज चलने के बावजूद शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। बीते 15 दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के चार लोगों को लक्षित कर हत्या का शिकार बनाया गया है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की हत्या की गई थी, जबकि 24 दिसंबर को अमृत मंडल की मॉब लिंचिंग कर दी गई। कुछ दिन पहले बजेंद्र विश्वास को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब खोकोन दास की मौत ने अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।