बांग्लादेश में एक और हिंदू की गई जान, दरिंदों ने बेरहमी से हमला करने के बाद लगाई थी आग

Edited By Updated: 03 Jan, 2026 11:36 PM

another hindu man has been killed by extremists in bangladesh

बांग्लादेश में तीन दिन पहले बर्बर हमले के बाद आग के हवाले किए गए एक हिंदू व्यापारी की शनिवार को मौत हो गई। अल्पसंख्यक समुदाय के एक नेता ने यह जानकारी दी। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के प्रवक्ता काजोल देबनाथ ने कहा कि दिसंबर से हिंदू...

नेशलन डेस्कः बांग्लादेश में तीन दिन पहले बर्बर हमले के बाद आग के हवाले किए गए एक हिंदू व्यापारी की शनिवार को मौत हो गई। अल्पसंख्यक समुदाय के एक नेता ने यह जानकारी दी। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के प्रवक्ता काजोल देबनाथ ने कहा कि दिसंबर से हिंदू समुदाय के किसी व्यक्ति की यह पांचवीं मौत है और बांग्लादेश में कट्टरपंथी समूह अल्पसंख्यक समुदायों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। खोकोन चंद्र दास (50) पर बुधवार रात को शरीयतपुर जिले के केउरभंगा बाजार के पास उस समय हमला किया गया जब वह अपनी दुकान बंद करके घर लौट रहे थे। देबनाथ ने कहा, ‘‘तीन दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद दास का आज सुबह निधन हो गया।''

मीडिया में आई खबर में बृहस्पतिवार को बताया गया था कि दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय करने वाले दास एक ऑटो रिक्शा में यात्रा कर रहे थे, तभी हमलावरों ने वाहन को रोक लिया और कथित तौर पर उनकी पिटाई की, धारदार हथियारों से वार किये और फिर उनपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।

खुद को बचाने की कोशिश में दास सड़क किनारे एक तालाब में कूद गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने शोर मचाया। पुलिस ने बताया कि हमलावर मौके से फरार हो गए। उसने बताया कि स्थानीय लोगों ने दास को बचाया और शरीयतपुर सदर अस्पताल ले गए, जहां उन्हें लगी चोट को देखते हुए ढाका रेफर कर दिया गया था। ढाका में चिकित्सकों ने बताया था कि दास के शरीर पर कई चोटें आई हैं, जिनमें पेट में गंभीर घाव के साथ-साथ चेहरे, सिर और हाथों पर जलने के घाव भी शामिल हैं।

देबनाथ ने कहा, ‘‘दिसंबर महीने में यह पांचवें हिंदू व्यक्ति की मौत है। इस महीने हमने समुदाय पर सात हमले दर्ज किए हैं।'' देबनाथ ने कहा, ‘‘किसी व्यक्ति या उसके घर को जलाने के लिए पेट्रोल या बारूद का इस्तेमाल करना सिर्फ आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि एक अशुभ संकेत है... शायद हम एक कट्टरपंथी (दक्षिणपंथी) संस्कृति के उदय के साक्षी बन रहे हैं।'' 

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