Edited By Mehak,Updated: 18 Mar, 2026 05:19 PM

चैत्र नवरात्र 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाए जाएंगे, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान व्रत रखने के साथ आचरण और खानपान में पवित्रता जरूरी होती है। तामसिक भोजन, क्रोध, नशा, बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। साथ ही पूजा और पाठ...
नेशनल डेस्क : इस साल चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं और मां के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए विशेष ध्यान रखते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र केवल पूजा तक सीमित नहीं है। इस दौरान आचरण, खानपान और दिनचर्या में भी पवित्रता और अनुशासन बनाए रखना आवश्यक माना जाता है। वहीं, कुछ ऐसी आदतें हैं जिनसे बचना चाहिए ताकि व्रत और पूजा पूरी तरह से सफल हो।
तामसिक भोजन से दूर रहें
नवरात्र के दिनों में मांस, शराब, लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक वस्तुओं का सेवन वर्जित होता है। इन दिनों केवल सात्विक भोजन करना चाहिए। सात्विक भोजन मन को शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरता है, जिससे पूजा और व्रत में मनोबल बना रहता है।
क्रोध और विवाद से बचें
नवरात्र केवल शरीर की शुद्धि का समय नहीं, बल्कि मन की शुद्धि का भी अवसर है। इस दौरान गुस्सा करना, झगड़ा करना या कठोर शब्द बोलना वर्जित माना जाता है। शांत और सौम्य व्यवहार रखने से व्रत का फल अधिक मिलता है।
बाल, दाढ़ी और मूंछ काटने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति नवरात्र का व्रत रखता है, उसे इन नौ दिनों में बाल, दाढ़ी या मूंछ नहीं कटवानी चाहिए। इसे व्रत और पूजा के नियमों के खिलाफ माना जाता है और इससे व्रत की पवित्रता पर असर पड़ सकता है।
नाखून काटने से बचें
नवरात्र के दौरान नाखून काटना भी शुभ नहीं माना जाता। माना जाता है कि यह समय शरीर और आत्मा की पवित्रता बनाए रखने का है, इसलिए शरीर से जुड़ी छोटी-छोटी गतिविधियों में भी संयम रखना चाहिए।
नशे से दूर रहें
व्रत के समय तंबाकू, शराब या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। यह व्रत की पवित्रता को प्रभावित कर सकता है और पूजा के दौरान मन को विचलित कर सकता है।
पाठ के समय ध्यान बनाए रखें
यदि आप दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या किसी अन्य मंत्र का पाठ कर रहे हैं, तो बीच में उठना या किसी से बात करना उचित नहीं माना जाता। पूरे मन और श्रद्धा के साथ पाठ करना ही श्रेष्ठ माना गया है।
घर को खाली न छोड़ें
नवरात्र के दौरान यदि घर में अखंड ज्योति जलाई गई है, तो घर को खाली छोड़कर बाहर जाना वर्जित माना जाता है। ऐसा करने से पूजा अधूरी मानी जाती है और घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है।