Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 02 Mar, 2026 08:55 PM

महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित Tarapur MIDC के बोईसर औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक बड़े केमिकल रिसाव से अफरा-तफरी मच गई। प्लॉट डी-17 पर मौजूद Bhageria Chemicals (पूर्व में जेनिथ केमिकल्स) से ओलियम गैस लीक होने की सूचना मिलते ही प्रशासन...
नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित Tarapur MIDC के बोईसर औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक बड़े केमिकल रिसाव से अफरा-तफरी मच गई। प्लॉट डी-17 पर मौजूद Bhageria Chemicals (पूर्व में जेनिथ केमिकल्स) से ओलियम गैस लीक होने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया।
दोपहर करीब 2 बजे स्टोरेज टैंक या उससे जुड़े सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी के कारण सल्फर ट्राईऑक्साइड (SO₃) आधारित फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड का रिसाव शुरू हुआ। देखते ही देखते गैस का प्रभाव 3 से 5 किलोमीटर के दायरे में फैल गया।
2600 से ज्यादा लोगों को निकाला गया, स्कूल भी खाली
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फैक्ट्री परिसर, आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों और MIDC कॉलोनी को खाली करा दिया। कुल 2600 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जिनमें लगभग 1600 स्कूली छात्र शामिल थे। तारापुर और आसपास के गांवों — सलवाद और पास्थल — में रहने वाले लोगों को भी सतर्क किया गया। स्थानीय स्कूलों को तुरंत बंद कर बच्चों को घर भेजा गया।
लोगों में आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ
गैस के संपर्क में आने से कई लोगों ने आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की। दो कर्मचारियों को एहतियातन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। फिलहाल किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है।
NDRF, फायर ब्रिगेड और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
रिसाव की सूचना मिलते ही बोईसर MIDC फायर ब्रिगेड, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। National Disaster Response Force (NDRF) की टीम को भी तैनात किया गया। गैस को नियंत्रित करने के लिए रेत और अन्य रासायनिक उपायों का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे प्रभावित इलाके से दूर रहें और नाक-मुंह को गीले कपड़े या मास्क से ढककर रखें।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
तारापुर MIDC पहले भी औद्योगिक दुर्घटनाओं के कारण चर्चा में रहा है। अगस्त 2025 में मेडले फार्मास्यूटिकल्स में नाइट्रोजन गैस रिसाव से चार मजदूरों की मौत हो गई थी। इसके अलावा क्लोरीन और अन्य जहरीली गैसों के रिसाव की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कंपनी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।