यात्रियों के लिए बड़ी खबर: ट्रेन के कोच में मग और चेन का झंझट खत्म, जानें रेलवे ने क्यों किया बदलाव?

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 12:55 PM

big news for passengers the hassle of mugs and chains in train coaches is over

अगर आप ट्रेन से यात्रा करते हैं, तो शायद आपने देखा होगा कि हर डिब्बे के टॉयलेट में फर्श के पास चेन से बंधा स्टील का मग रखा रहता है। यह व्यवस्था जनरल, स्लीपर और एसी कोच सभी में आम रही है। लेकिन अब यह नजारा बदलने वाला है।

Indian Railways new rule : अगर आप ट्रेन से यात्रा करते हैं, तो शायद आपने देखा होगा कि हर डिब्बे के टॉयलेट में फर्श के पास चेन से बंधा स्टील का मग रखा रहता है। यह व्यवस्था जनरल, स्लीपर और एसी कोच सभी में आम रही है। लेकिन अब यह नजारा बदलने वाला है। रेलवे ने टॉयलेट से चेन वाले स्टेनलेस स्टील के मग हटाने और उनकी जगह जेट स्प्रे लगाने का फैसला किया है।

रेलवे ने क्यों किया बदलाव?
रेल मंत्रालय ने सभी रेलवे जोन को निर्देश दिया है कि फर्श के पास लगे पानी के नल और चेन से बंधे स्टील मग हटा दिए जाएं। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि ट्रेन की तेज रफ्तार में यात्रियों द्वारा मग में पानी भरते समय अधिकांश पानी फर्श पर गिर जाता था। इससे टॉयलेट गीला रहता और यात्रियों के जूते-चप्पल से गंदगी फैलती थी। अतिरिक्त समस्या यह थी कि समय के साथ प्लास्टिक फर्श असमतल हो जाता और छोटे-छोटे गड्ढों में पानी जमा होने लगता। इससे बदबू और अस्वच्छता बढ़ती थी। यात्रियों की ओर से लगातार शिकायतें भी मिल रही थीं कि टॉयलेट साफ नहीं रहता।


ट्रेन में मग की व्यवस्था कैसे शुरू हुई?
शुरुआती दौर में भारतीय ट्रेनों के टॉयलेट में केवल एक नल होता था। बाद में एसी कोचों में सुविधा बढ़ाने के लिए स्टील का मग रखा गया। चोरी की घटनाओं के बाद इन्हें चेन से बांध दिया गया। यह व्यवस्था कई सालों से चली आ रही थी। नई व्यवस्था लागू करने से पहले रेलवे ने इसका परीक्षण भी किया। उत्तर रेलवे में ट्रायल के दौरान शताब्दी एक्सप्रेस के कोचों में जेट स्प्रे लगाए गए और चेन वाले मग हटा दिए गए। परिणामों से पता चला कि टॉयलेट का फर्श पहले से ज्यादा सूखा और साफ रहने लगा और पानी जमा होने की शिकायतें कम हुईं।


आगे की योजना
रेल मंत्रालय ने सभी रेलवे जोनों को अपनी चुनी हुई 10 ट्रेनों के एसी कोचों में इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू करने को कहा है। तीन महीने के बाद अनुपालन रिपोर्ट और प्रदर्शन संबंधी फीडबैक मांगा जाएगा। उत्तर रेलवे ने मंत्रालय को बताया कि 182 शताब्दी एक्सप्रेस कोचों में पहले ही जेट स्प्रे लगाए जा चुके हैं और चेन वाले मग हटा दिए गए हैं। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से टॉयलेट में पानी जमा होने की समस्या कम होगी, सफाई का स्तर बेहतर होगा और यात्रियों को साफ-सुथरा वातावरण मिलेगा।

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