Cervical Cancer: महिलाओं के लिए साइलेंट किलर बन रहा है सर्वाइकल कैंसर, जानें कैसे 5 मिनट का टेस्ट बचाएगा जान

Edited By Updated: 17 Feb, 2026 11:59 AM

cervical cancer is becoming a silent killer for women learn how a 5 minute

भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के बीच तेजी से फैलती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आ रहा है। यह महिलाओं में पाए जाने वाले कैंसर के मामलों का बड़ा हिस्सा है और अब देश में दूसरा सबसे आम कैंसर माना जा रहा है।

नेशनल डेस्क: भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के बीच तेजी से फैलती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आ रहा है। यह महिलाओं में पाए जाने वाले कैंसर के मामलों का बड़ा हिस्सा है और अब देश में दूसरा सबसे आम कैंसर माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर की गई जांच इस बीमारी से बचाव में अहम भूमिका निभाती है। खास बात यह है कि यह उन चुनिंदा कैंसरों में शामिल है जिनकी प्रभावी, किफायती और भरोसेमंद स्क्रीनिंग उपलब्ध है।

एचपीवी संक्रमण है मुख्य कारण
डॉक्टरों के मुताबिक, लगभग 70 से 80 प्रतिशत मामलों में इस कैंसर की वजह हाई-रिस्क एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण होता है। यह संक्रमण लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के शरीर में रह सकता है। धीरे-धीरे यह गर्भाशय के मुंह यानी सर्विक्स की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव पैदा करता है, जो आगे चलकर प्रीकैंसर या कैंसर में बदल सकते हैं। इसलिए एचपीवी से बचाव और नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।


पैप टेस्ट से होती है शुरुआती पहचान
सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए पैप स्मीयर या पैप टेस्ट एक महत्वपूर्ण जांच है। यह जांच 1940 के दशक में विकसित की गई थी और आज भी व्यापक रूप से उपयोग में लाई जाती है। इस प्रक्रिया में सर्विक्स से कुछ कोशिकाएं लेकर माइक्रोस्कोप से उनकी जांच की जाती है। यदि शुरुआती असामान्य बदलाव समय रहते पकड़ में आ जाएं, तो इलाज आसान और अधिक सफल हो सकता है।


दो तरीकों से किया जाता है पैप टेस्ट
पैप टेस्ट मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जाता है। पारंपरिक विधि में सर्विक्स से ली गई कोशिकाओं को स्लाइड पर रखकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाता है। दूसरी ओर, लिक्विड बेस्ड साइटोलॉजी तकनीक में विशेष ब्रश की मदद से कोशिकाएं लेकर तरल माध्यम में सुरक्षित किया जाता है। इस उन्नत पद्धति से उसी नमूने में एचपीवी डीएनए की जांच भी संभव है, जिससे जोखिम का बेहतर मूल्यांकन किया जा सकता है।


कब से शुरू करें जांच और कितनी बार कराएं
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 21 वर्ष की उम्र से या यौन सक्रिय होने के बाद महिलाओं को पैप टेस्ट शुरू कर देना चाहिए। 21 से 30 वर्ष की महिलाओं को हर तीन साल में एक बार यह जांच करानी चाहिए। वहीं 30 से 65 वर्ष की आयु वर्ग में हर तीन साल में पैप टेस्ट या हर पांच साल में पैप टेस्ट के साथ एचपीवी टेस्ट कराने की सिफारिश की जाती है। स्क्रीनिंग का उद्देश्य बिना लक्षण वाली महिलाओं में भी शुरुआती बदलाव का पता लगाना है।


जांच के दौरान रखें ये सावधानियां
यह जांच सरल है और क्लिनिक में कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। जांच के दिन टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग नहीं करना चाहिए और पीरियड्स के दौरान टेस्ट टालना बेहतर होता है। यदि रिपोर्ट में “स्क्रीन पॉजिटिव” आता है तो इसका मतलब कैंसर होना नहीं, बल्कि आगे की जांच की आवश्यकता है। वहीं “स्क्रीन नेगेटिव” रिपोर्ट सामान्य स्थिति का संकेत देती है।


जागरूकता और नियमित स्क्रीनिंग ही बचाव का रास्ता
डॉक्टरों का मानना है कि नियमित स्क्रीनिंग से सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय पर जांच, सही जानकारी और उचित इलाज के जरिए महिलाएं इस गंभीर बीमारी से खुद को सुरक्षित रख सकती हैं और स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।

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