Edited By Sanjeev,Updated: 13 Sep, 2026 12:52 PM

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग रविवार को भारत की मेजबानी में हुए 18वें ब्रिक्स समिट में शामिल होने के बाद नई दिल्ली से रवाना हो गए। शी जिनपिंग ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिन तक चले ब्रिक्स समिट में हिस्सा लिया। उन्होंने नई दिल्ली में ब्रिक्स...
नई दिल्ली : चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग रविवार को भारत की मेजबानी में हुए 18वें ब्रिक्स समिट में शामिल होने के बाद नई दिल्ली से रवाना हो गए। शी जिनपिंग ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिन तक चले ब्रिक्स समिट में हिस्सा लिया। उन्होंने नई दिल्ली में ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं के साथ मिलकर पेड़ लगाने के एक कार्यक्रम में भाग लिया। शी और ब्रिक्स सदस्य देशों के अन्य नेताओं ने भारत मंडपम में 'भारत इनोवेट्स एक्सपोजिशन' का दौरा किया।
भारत यात्रा के दौरान शी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की जिसमें दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि "मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए" और फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए। बैठक के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, 'दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई लगातार प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए। मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन आपसी बातों आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित का पालन करना चाहिए।'
बैठक के दौरान, पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए एक जरूरी आधार बनी हुई है। MEA के बयान में आगे कहा गया, 'उन्होंने सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और समझ का पालन करने की दोनों पक्षों की जरूरत पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक नजरिए और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और आपसी सहमति वाले समाधान के प्रति प्रतिबद्धता जताई।'
दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संबंधों में हुई प्रगति पर भी ध्यान दिया और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यावसायिक संबंधों और लोगों की आवाजाही को और बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया। बयान में आगे कहा गया, 'आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर उन्होंने एक-दूसरे की चिंताओं (जिनमें संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं) को दूर करने और सार्थक व अनुमानित बाजार पहुंच को आसान बनाने की जरूरत पर जोर दिया।'
MEA के अनुसार दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर तथा चुनौतियों से निपटने में आपसी सहमति के दायरे को बढ़ाते रहना चाहिए। इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और BRICS समिट-2026 की सफलता में उसके योगदान की सराहना की।