Edited By Mansa Devi,Updated: 25 Mar, 2026 03:59 PM

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर‘नारी वंदन अधिनियम, 2023'के लागू होने के मामले में 'अचानक यू-टर्न' लेने का आरोप लगाया और इसे ज़रूरी राष्ट्रीय मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया।
नेशनल डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर‘नारी वंदन अधिनियम, 2023'के लागू होने के मामले में 'अचानक यू-टर्न' लेने का आरोप लगाया और इसे ज़रूरी राष्ट्रीय मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया। रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि सितंबर 2023 में जिस नये संसद भवन का उद्घाटन हुआ था, वहीं इस ऐतिहासिक कानून को पारित किया गया था। इस कानून के ज़रिए संविधान में संशोधन करके लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया था।
इस कानून में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान शामिल था। उन्होंने कहा कि इन आरक्षणों को लागू करने का काम स्पष्ट तौर पर परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने से जोड़ा गया था। श्री रमेश ने कहा, 'ये दोनों आरक्षण तभी लागू होने थे, जब परिसीमन और जनगणना का काम पूरा हो जाता।'
कांग्रेस नेता ने बताया कि विधेयक पर संसदीय बहस के दौरान कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनावों से ही इसे तुरंत लागू करने की ज़ोरदार मांग की थी। उन्होंने कहा, 'तब मोदी सरकार ने यह तकर् दिया था कि परिसीमन और जनगणना का काम पहले पूरा किए बिना ऐसा करना संभव नहीं है।' प्रधानमंत्री पर अपना रुख बदलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, 'अब‘यू-टर्न उस्ताद'ने 30 महीने बाद अचानक अपना मन बदल लिया है और अब वह परिसीमन और जनगणना का काम पूरा किए बिना ही आरक्षण लागू करना चाहते हैं।'
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम का समय राजनीतिक रूप से प्रेरित है। कांग्रेस नेता ने कहा, 'प्रधानमंत्री डब्ल्यूएमडी यानी‘ध्यान भटकाने वाले बड़े हथियार'इस्तेमाल करने में बेजोड़ हैं। अपनी विदेश नीति की असफलताओं और देश में एलपीजी और ऊर्जा संकट से लोगों का ध्यान हटाने के लिए बेताब होकर, उन्होंने यह नयी पहल की है।' उन्होंने कहा कि सरकार अगले पखवाड़े में संसद का दो दिन का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है, ताकि इस कानून में संशोधन करके आरक्षण के प्रावधानों को लागू किया जा सके।
उन्होंने कहा, 'इसका पूरा राजनीतिक फ़ायदा उठाने की चाहत में, उन्होंने यह बात ज़ाहिर कर दी है कि ऐसा सत्र बुलाया जाएगा।' श्री रमेश ने कहा कि विपक्षी पाटिर्यों ने मिलकर सरकार को एक पत्र लिखा है, जिसमें यह मांग की गई है कि 29 अप्रैल के बाद जब विधानसभा चुनावों का मौजूदा दौर खत्म हो जाएगा,एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
उन्होंने कहा, 'इस तरह के अहम संशोधनों के लिए विस्तृत चर्चा और आम सहमति की ज़रूरत होती है।' उन्होंने उन रिपोटरं पर भी चिंता जताई, जिनमें कहा गया है कि सरकार लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं का आकार 50 प्रतिशत तक बढ़ाने पर विचार कर रही है। उन्होंने इस प्रस्ताव पर गहन विचार-विमर्श करने की मांग की है।
प्रस्तावित संसदीय सत्र के समय को लेकर चिंता जताते हुए श्री रमेश ने चुनाव आयोग की‘आचार संहिता'के कमज़ोर पड़ने की बात कहकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'आचार संहिता अब सिफऱ्‘मोदी की प्रचार संहिता'बनकर रह गई है। अप्रैल में विशेष सत्र बुलाना एक एमसीसी का उल्लंघन होगा, जबकि यह दूसरी एमसीसी के अनुरूप होगा।'
कांग्रेस नेता ने जाति जनगणना कराने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाया, जिसकी घोषणा सरकार ने अप्रैल 2025 में की थी। उन्होंने ज़क्रि किया कि इस माँग को पहले सत्ताधारी पक्ष ने खारिज कर दिया था, और भारत जोड़ो न्याय यात्रा तथा 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं पर 'शहरी नक्सली मानसिकता' को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।