Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Mar, 2026 02:50 PM

अगर आप अक्सर लखनऊ से बहराइच, गोंडा या नेपाल की यात्रा करते हैं, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए लखनऊ से नेपाल बॉर्डर तक 6 लेन हाईवे बनाने का फैसला किया है। इस परियोजना से...
नेशनल डेस्क: अगर आप अक्सर लखनऊ से बहराइच, गोंडा या नेपाल की यात्रा करते हैं, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए लखनऊ से नेपाल बॉर्डर तक 6 लेन हाईवे बनाने का फैसला किया है। इस परियोजना से राजधानी से नेपाल सीमा तक का सफर महज 2 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
राजधानी लखनऊ को सीधे नेपाल सीमा से जोड़ने के लिए 153 किलोमीटर लंबे छह-लेन हाईवे के निर्माण को हरी झंडी मिल गई है। यह प्रोजेक्ट न केवल कनेक्टिविटी को सुधारेगा, बल्कि तराई क्षेत्र के जिलों के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार भी खोलेगा।
कनेक्टिविटी का नया हब बनेगा पूर्वी उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी यूपी की अर्थव्यवस्था को नई गति देने के उद्देश्य से बाराबंकी-नेपाल हाईवे के चौड़ीकरण और आधुनिकीकरण का फैसला लिया है। यह 153 किलोमीटर लंबी सड़क लखनऊ से शुरू होकर बाराबंकी, गोंडा और बहराइच जैसे महत्वपूर्ण जिलों को कवर करते हुए सीधे अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पहुंचेगी। खास बात यह है कि जेवर एयरपोर्ट के बाद यह प्रदेश का दूसरा और पूर्वांचल का पहला ऐसा बड़ा प्रोजेक्ट है जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है।
हाइब्रिड मॉडल से आएगी निर्माण में तेजी
इस महत्वाकांक्षी मेगा प्रोजेक्ट पर लगभग 27,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा। सरकार इसे 'हाइब्रिड एन्युटी मॉडल' (HAM) पर तैयार कर रही है। इस तकनीक में निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 60 प्रतिशत हिस्सा निजी डेवलपर्स द्वारा लगाया जाएगा। इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निजी कंपनियों पर अगले 15 से 20 वर्षों तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी होगी, जिससे न केवल सड़क की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की रहेगी, बल्कि इसके निर्माण में देरी होने की संभावना भी बेहद कम हो जाएगी।
व्यापार और पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
इस 6-लेन कॉरिडोर के बनने से लखनऊ और नेपाल के बीच की दूरी समय के पैमाने पर काफी सिमट जाएगी। यात्रा समय घटने से ईंधन की बचत तो होगी ही, साथ ही बहराइच और नेपाल के पर्यटन केंद्रों तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा। माल ढुलाई सस्ती होने के कारण स्थानीय उद्योगों, विशेषकर कृषि आधारित व्यापार को सीधा लाभ पहुंचेगा। यह हाईवे भविष्य में पूर्वी उत्तर प्रदेश की 'लाइफलाइन' साबित होने वाला है, जो स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।