Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Mar, 2026 10:29 AM

ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते संघर्ष ने शेयर बाजार में आज सेंसेक्स और निफ्टी में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। 2 मार्च 2026 (सुबह 9:24 बजे IST) सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रही। सोमवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex...
stock market: ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते संघर्ष ने शेयर बाजार में आज सेंसेक्स और निफ्टी में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। 2 मार्च 2026 (सुबह 9:24 बजे IST) सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रही। सोमवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 1,009.39 अंक (1.24%) की गिरावट के साथ 80,277.80 पर कारोबार करता दिखा। वहीं Nifty 50 भी 282.35 अंक (1.12%) लुढ़ककर 24,896.30 के स्तर पर आ गया।
शुरुआती कारोबार में हाहाकार: प्री-मार्केट से लेकर ओपनिंग तक का मंजर
बाजार की शुरुआत से पहले ही प्री-ओपनिंग सेशन में भारी तबाही के संकेत मिल गए थे, जब सेंसेक्स 2,800 अंकों और निफ्टी 500 अंकों के नुकसान के साथ गोता लगाता दिखा। हालांकि, आधिकारिक ट्रेडिंग शुरू होने पर सेंसेक्स 1,125 अंकों की गिरावट के साथ खुला। कुछ ही घंटों के भीतर बाजार में हल्की रिकवरी की कोशिशें जरूर हुईं, लेकिन सुबह 10:15 बजे तक सेंसेक्स 1,009.39 अंकों की भारी गिरावट के साथ 80,281 के स्तर पर संघर्ष करता दिखा। ईरान युद्ध के चलते ग्लोबल सेंटीमेंट इतने खराब हैं कि निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) को ही सबसे सुरक्षित रास्ता माना, जिससे बाजार पर बिकवाली का दबाव लगातार हावी रहा।
पोर्ट और लॉजिस्टिक्स शेयरों में भारी टूट: डेलहिवरी और अदानी पोर्ट्स को झटका
युद्ध के कारण समुद्री रास्तों और सप्लाई चेन पर मंडरा रहे खतरे का सबसे बुरा असर लॉजिस्टिक्स और पोर्ट सेक्टर से जुड़े शेयरों पर पड़ा है। इंट्रा-डे कारोबार के दौरान अदानी पोर्ट्स 4.6 प्रतिशत तक लुढ़क गया, जबकि गुजरात पिपावाव पोर्ट और जेएसडब्ल्यू इंफ्रा के शेयरों में 4.7 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में 'डेलहिवरी' का शेयर 10 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ टूट गया और ब्लू डार्ट एक्सप्रेस में भी करीब 7 प्रतिशत की कमजोरी दिखी। सरकारी कंपनी 'कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया' के लिए भी दिन बेहद खराब रहा, जिसका शेयर 6.8 प्रतिशत गिरकर अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर 461.85 रुपये पर जा पहुंचा। इसके अलावा आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टीसीएस भी 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ बाजार पर बोझ बनी रही।
युद्ध, कच्चा तेल और सोने का 'ट्रिपल अटैक'
बाजार के जानकारों का कहना है कि आज की गिरावट केवल युद्ध की खबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई आर्थिक कारक एक साथ काम कर रहे हैं। कच्चा तेल चार साल के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे भारत जैसे आयात निर्भर देश की चिंताएं बढ़ गई हैं। दूसरी ओर, सोने और चांदी की कीमतों में आए भारी उछाल ने निवेशकों के पैसे को इक्विटी मार्केट से निकालकर सुरक्षित संपत्तियों (Safe Havens) की ओर मोड़ दिया है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि निवेशकों की मानसिकता इस समय पूरी तरह रक्षात्मक है और दिन ढलते-ढलते बिकवाली की यह रफ्तार और तेज हो सकती है। ऐसे में रिटेल निवेशकों को किसी भी नई पोजीशन बनाने से पहले बेहद सावधानी बरतने और बाजार की स्थिरता का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।