Edited By Parveen Kumar,Updated: 27 Feb, 2026 06:27 PM

सड़क पर अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बची है। ड्राइविंग को अगर अब भी सिर्फ एक रोज़मर्रा की आदत समझ रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। 1 जनवरी 2026 से लागू हुए नए मोटर व्हीकल प्रावधानों ने साफ कर दिया है कि बार-बार गलती करने वालों के लिए अब सीधा असर...
नेशनल डेस्क : सड़क पर अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बची है। ड्राइविंग को अगर अब भी सिर्फ एक रोज़मर्रा की आदत समझ रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। 1 जनवरी 2026 से लागू हुए नए मोटर व्हीकल प्रावधानों ने साफ कर दिया है कि बार-बार गलती करने वालों के लिए अब सीधा असर उनके ड्राइविंग लाइसेंस पर पड़ेगा। आइए समझते हैं पूरा मामला नए अंदाज़ में।
बार-बार नियम तोड़े तो लाइसेंस जाएगा
सरकार ने “फाइव वायलेशन पॉलिसी” लागू की है। इसका मतलब है कि यदि कोई चालक एक कैलेंडर वर्ष (1 जनवरी से 31 दिसंबर) के भीतर पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड या पूरी तरह रद्द किया जा सकता है। अंतिम निर्णय संबंधित आरटीओ या डीटीओ द्वारा लिया जाएगा। यानी अब हर गलती का हिसाब रखा जाएगा और बहाने काम नहीं आएंगे।
सिर्फ बड़ी दुर्घटना नहीं, छोटी लापरवाही भी भारी
अब यह मत समझिए कि केवल गंभीर एक्सीडेंट ही गिने जाएंगे। रोजमर्रा की आम गलतियां भी आपकी “पांच की गिनती” में जुड़ेंगी। तेज रफ्तार, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट गाड़ी चलाना, रेड लाइट पार करना, गलत जगह पार्किंग, ओवरलोडिंग या लापरवाह ड्राइविंग- ये सभी उल्लंघन रिकॉर्ड में दर्ज होंगे। पांच बार नाम आने पर लाइसेंस खतरे में पड़ सकता है।
हर चालान का डिजिटल हिसाब
अब ई-चालान सिस्टम पूरी तरह डिजिटल और एकीकृत हो चुका है। आपके वाहन, आधार और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर दर्ज होती है। इसका मतलब है कि किसी दूसरे शहर में किया गया उल्लंघन भी आपके रिकॉर्ड में शामिल होगा। “यह तो बाहर का चालान है” कहकर बच निकलने का रास्ता अब बंद हो गया है।
क्यों उठाया गया इतना सख्त कदम?
भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं। सरकार का मानना है कि केवल जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि कई लोग पैसे देकर फिर वही गलती दोहराते हैं। इसलिए अब सीधा असर लाइसेंस पर डालने का फैसला लिया गया है, ताकि चालक अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लें।
अब ड्राइवरों के लिए क्या जरूरी?
सबसे पहले समय-समय पर अपने लाइसेंस से जुड़े चालानों की जांच करें। इसके लिए आप परिवहन सेवा (Parivahan) पोर्टल या आधिकारिक ऐप का उपयोग कर सकते हैं। यदि कोई चालान लंबित है तो उसे 45 दिनों के भीतर जमा करें, क्योंकि पेंडिंग चालान आपकी अन्य सरकारी सेवाओं- जैसे आरसी ट्रांसफर या पते में बदलाव- को भी प्रभावित कर सकता है। सबसे अहम बात, अब हेलमेट और सीट बेल्ट सिर्फ चालान से बचने का जरिया नहीं, बल्कि लाइसेंस और जिंदगी दोनों बचाने का साधन हैं।